
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: रतनपुर-केंदा-केंवची एनएच-45 पर 600 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क की पोल पहली ही बारिश और भारी वाहनों के दबाव ने खोल दी है। स्थिति यह है कि लालपुर से लेकर मझवानी व केंदा तक लगभग 30 से 40 किलोमीटर लंबी निर्माणाधीन सड़क जगह-जगह से धंस चुकी है, जो राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है।
रतनपुर-मंझवानी-केंदा-केंवची (आरएमकेके) मार्ग की बेहद खराब गुणवत्ता और मनमाने निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। प्रशासन और निर्माण एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा उन हजारों यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है, जो रोजाना इस मार्ग से जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। स्थानीय निवासी शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि सड़क पर भारी वाहनों के लगातार दबाव के कारण पूरी सड़क जगह-जगह धंस गई है।
ठेकेदार और निर्माण एजेंसी द्वारा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। मिट्टी और मुरूम पर साधारण रोलर चलाकर सड़क का बेस तैयार किया जा रहा है, जो बारिश में दलदल में तब्दील हो चुका है। यह सड़क अब आम जनता के लिए किसी जंजाल से कम नहीं है। बड़े-बड़े गड्ढे और कीचड़ के कारण वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले अहम मार्ग पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव और घटिया निर्माण के चलते आए दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
सड़क निर्माण के तय मानक
आरएमकेके मार्ग पर जाम और सड़क धंसने की एक बड़ी वजह बेतहाशा भारी कोल वाहनों का आवागमन है। टोल टैक्स बचाने और शार्टकट के लालच में कोयले से लदे 3 से 4 सौ ओवरलोडेड ट्रक निर्माणाधीन एनएच-45 का उपयोग कर रहे हैं। भारी वाहनों का वजन सड़क के कमजोर सब-बेस को बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है। यदि वाहनों का नियमन नहीं किया गया, तो सड़क बनने से पहले ही पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।
रतनपुर केंदा मार्ग की खराब स्थिति को लेकर जानकारी मिली है। टीएल बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि सड़क निर्माण पर लगातार नजर रखी जाए और सड़क को जल्द ही चलने लायक बनाया जाए, जिससे लोगो को सुगम यातायात की सुविधा मिल सके। संजय अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर