
नईदुनिया ब्यूरो, बिलासपुर। राज्य की स्लम (मलिन) और पुरानी झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर है। छत्तीसगढ़ शासन ने नगरीय निकायों में जमा ''''गरीबों की सेवा निधि'''' की राशि के उपयोग को लेकर कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब इस फंड का पैसा सीधे तौर पर स्लम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने और विस्थापितों के लिए बने पुराने सरकारी आवासों की कायाकल्प करने में खर्च किया जाएगा।
नगरीय शासन एवं विकास विभाग के सचिव द्वारा इस संबंध में राज्य के सभी नगर पालिक निगमों के आयुक्तों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को आदेश जारी कर इसका कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नगरीय निकायों को अपने अंतर्गत आने वाले स्लम और पुरानी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू करना होगा।
इस मद की राशि का मुख्य रूप से तीन बुनियादी आवश्यकताओं पर उपयोग किया जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि स्लम क्षेत्रों से विस्थापित कर आवासहीनों को जिन सरकारी बहुमंजिला मकानों में बसाया जाता है, वे देखरेख के अभाव में जर्जर होने लगते हैं। सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है।
स्वच्छ पेयजल: बस्तियों में साफ पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना।
सटीक मलवहन व्यवस्था: जलभराव और गंदगी से मुक्ति के लिए सीवरेज व नालियों का सुदृढ़ीकरण।
सार्वजनिक शौचालय: बस्तियों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए सुलभ और चालू हालत में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण व संधारण।
पुराने सरकारी मकानों की सुधरेगी हालत, मरम्मत को प्राथमिकता
आदेश के मुताबिक: 'गरीबों की सेवा निधि' का एक बड़ा हिस्सा आईएचएसडीपी, बीएसयूपी और अन्य पुरानी शासकीय आवासीय परियोजनाओं के तहत निर्मित मकानों के आवश्यक रख-रखाव, मरम्मत और उन्नयन पर खर्च किया जाएगा।
नियमों के दायरे में होगा पाई-पाई का हिसाब
विभाग ने साफ किया है कि यह पूरी कवायद छत्तीसगढ़ नगरपालिका निगम अधिनियम 1956 की कंडिका 128-ग और छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 की कंडिका 117-ग के कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है। कॉलोनाइजरों के नियमन और संशोधन नियमों के तहत जो राशि ''''गरीबों की सेवा निधि'''' मद में संकलित हुई है, उसका उपयोग केवल और केवल गरीबों के रहन-सहन के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए ही किया जा सकेगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।