• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

पत्नी की आय पर सवाल पूछने से पति को नहीं रोक सकता फैमिली कोर्ट, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि भरण-पोषण के मामलों में पत्नी द्वारा आय का हलफनामा दाखिल किए जाने पर पति को उस पर जिरह करने से नहीं रोका जा स...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 04:26:38 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Sep 2026 04:26:38 PM (IST)
पत्नी की आय पर सवाल पूछने से पति को नहीं रोक सकता फैमिली कोर्ट, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. भरण-पोषण के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी।
  2. आय के हलफनामे पर जिरह करने का अधिकार छीना नहीं जा सकता।
  3. अदालत ने दुर्ग के अखिल सहानी मामले में सुनाया यह आदेश।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा है कि किसी पक्ष द्वारा आय संबंधी हलफनामा दाखिल किए जाने के बाद दूसरे पक्ष को उसके तथ्यों पर जिरह करने का उचित अवसर मिलना चाहिए। कोर्ट ने पत्नी की आय के स्रोत से जुड़े सवाल पूछने से पति को रोकने वाले फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया।

यह मामला याचिकाकर्ता अखिल सहानी, पिता अनिल सहानी, उम्र 34 वर्ष, निवासी दुर्ग का है। मामले में अदिति ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 144 के तहत पति से भरण-पोषण की मांग की थी। पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट के राजनेश बनाम नेहा फैसले के निर्देशों के अनुसार अपनी आय और संपत्ति संबंधी हलफनामा दाखिल किया था।


पति ने इसी हलफनामे के तथ्यों को लेकर पत्नी से जिरह शुरू की, जिसमें उसकी आय के स्रोत और हलफनामे में दिए गए विवरण से संबंधित सवाल शामिल थे। लेकिन फैमिली कोर्ट ने 3 अगस्त 2026 के आदेश से पति को ऐसे सवाल पूछने से रोक दिया। बाक्स कोर्ट ने यह कहा जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने कहा कि राजनेश बनाम नेहा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आय-व्यय और संपत्ति संबंधी हलफनामे के संबंध में स्पष्ट व्यवस्था दी है।

यह भी पढ़ें- कम वेतन वाले पिता की नौकरी अनुकंपा नियुक्ति में बाधा नहीं, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट के आदेश में इस महत्वपूर्ण पहलू पर विचार नहीं किया गया। इसलिए तीन अगस्त 2026 का आदेश निरस्त किया जाता है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि फैमिली कोर्ट 11 सितंबर को पति को पत्नी के हलफनामे की सामग्री से संबंधित सवाल पूछने की अनुमति देगा।