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हाई कोर्ट का सरकार से तीखा सवाल: "अगर गौशालाओं में व्यवस्था दुरुस्त है, तो मवेशी सड़कों पर क्यों?"

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर के लाखासार गौधाम की अव्यवस्था और सड़कों पर घूमते बेसहारा मवेशियों को लेकर राज्य सरकार को घेरा है। सरकार ने कोर्ट में श...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sat, 16 May 2026 10:25:16 AM (IST)Updated Date: Sat, 16 May 2026 10:25:16 AM (IST)
हाई कोर्ट का सरकार से तीखा सवाल: "अगर गौशालाओं में व्यवस्था दुरुस्त है, तो मवेशी सड़कों पर क्यों?"

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ प्रदेश की 142 गौशालाओं में 39 हजार मवेशी होने का सरकारी दावा
  2. गौधाम मामले में सरकार के दावों पर चीफ जस्टिस की बेंच ने उठाए सवाल
  3. सार्वजनिक जगहों और सड़कों से मवेशी कम क्यों नहीं हो रहे? क्या दर्शाता

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः बिलासपुर जिले के लाखासार गोधाम की अव्यवस्था पर राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के समक्ष अपना जवाब पेश कर दिया है। शासन ने बताया है कि गोधाम में चारा, पानी और रहने की पर्याप्त व्यवस्था है। गोधाम में एक छोटे कमरे में 205 मवेशियों को ठूंसकर नहीं रखा गया था। शासन ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश में 142 पंजीकृत गौशालाएं हैं, जिनमें 39 हजार मवेशी रखे गए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पूछा कि अगर सब व्यवस्था ठीक है तो सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा कम क्यों नहीं हो रहा है।

मीडिया में प्रकाशित खबर को चीफ जस्टिस ने स्वत: संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने पशुपालन विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की तरफ से डिवीजन बेंच को बताया कि लाखासार स्थित सुरभि गौधाम 25 एकड़ में फैला है और वहां पशुओं के लिए तीन बड़े शेड और नेपियर घास की व्यवस्था है। चारा के लिए पांच एकड़ में नेपियर घास उगाई जा रही है। तीन बोरवेल चालू हालत में हैं।


राज्य शासन ने अपने जवाब में ये कहा

राज्य शासन ने शपथ पत्र में बताया, प्रदेश में 142 पंजीकृत गौशालाएं हैं, जिनमें 39 हजार मवेशी रखे गए हैं। राज्य सरकार के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि बार-बार यह संज्ञान में आ रहा है कि गोधाम बनने के बावजूद मवेशी सार्वजनिक जगहों पर हैं, जो यह बताता है, जिम्मेदार पक्षों द्वारा किए गए इंतजाम अभी भी नाकाफी हैं। इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

नोडल अधिकारियों की कर दी है नियुक्ति

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि सात नवंबर 2025 को एक आदेश जारी कर विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों का मुख्य काम जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के बीच समन्वय स्थापित करना है, ताकि छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 के तहत जब्त और बेसहारा मवेशियों का सही प्रबंधन हो सके। वहीं, जिला प्रशासन को विभाग के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि गोधामों में रहने वाले मवेशियों को केवल छत ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी सुविधाएं भी मिलें। जवाबदेही बनाए रखने के लिए अब हर महीने पशुपालन विभाग के संचालक को प्रोग्रेस रिपोर्ट भेजनी होगी।