बच्चे को अन्य लोग कम छुएं की चाह मां की अतिरिक्त संवेदनशीलता, ये मानसिक क्रूरता नहीं: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाया है कि बच्चे को लेकर मां की अत्यधिक संवेदनशीलता या छोटी-मोटी पारिवारिक अनबन को मानसिक क्रूरता नहीं कहा जा सकता। अदालत ने पत्नी के साथ रहने की इच्छा और पति द्वारा ठोस प्रयास न किए जाने को आधार बनाते हुए पति की तलाक की अपील खारिज कर दी है।
Publish Date: Thu, 23 Jul 2026 09:30:07 AM (IST)Updated Date: Thu, 23 Jul 2026 09:30:07 AM (IST)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- मां की अतिरिक्त संवेदनशीलता मानसिक क्रूरता नहीं।
- छोटी-मोटी अनबन या मतभेद तलाक का आधार नहीं।
- हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला रखा बरकरार।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अन्य लोग बच्चे को कम छुएं की चाह रखना एक मां की अतिरिक्त संवेदनशीलता हो सकती है, लेकिन इसे मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। पति-पत्नी के बीच होने वाली सामान्य असहमति, छोटी-मोटी कहासुनी या स्वभाव में अंतर भी मानसिक क्रूरता का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह विच्छेद तभी संभव है, जब आरोप गंभीर और ठोस साक्ष्यों से सिद्ध हों।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने रायपुर निवासी एक पति की तलाक अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। अदालत ने पाया कि रिकार्ड से स्पष्ट है कि पत्नी हमेशा पति के साथ वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करने के लिए तैयार थी, जबकि पति ने रिश्ते को बचाने की कोई गंभीर पहल नहीं की। दंपती का विवाह छह दिसंबर 2014 को हुआ था। विवाह के बाद उनके दो बच्चे हुए। बाद में पारिवारिक विवाद बढ़ने पर पत्नी दोनों बच्चों के साथ मायके चली गई।
पति ने फैमिली कोर्ट में मानसिक क्रूरता और परित्याग का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी। उसका कहना था कि पत्नी ननदों के साथ नहीं रहना चाहती थी, रिश्तेदारों के प्रति उसका व्यवहार ठीक नहीं था और वह आत्महत्या की धमकी देती थी। फैमिली कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर याचिका खारिज कर दी, जिसके विरुद्ध पति ने हाई कोर्ट में अपील की थी।
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हाई कोर्ट ने खारिज किए पति के आरोप
पत्नी द्वारा पूर्व में हाथ की नस काटने की घटना पर अदालत ने कहा कि उसने शपथपत्र में अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसा न करने और पति के साथ सुखपूर्वक रहने की इच्छा व्यक्त की थी। इससे उसके मन में वैवाहिक संबंध तोड़ने या पति के प्रति दुर्भावना का कोई संकेत नहीं मिलता। अदालत ने कहा कि रिकार्ड से यह साबित नहीं होता कि पत्नी ने पति का परित्याग किया। इसके विपरीत, वह लगातार पति के साथ रहने की इच्छा जताती रही, जबकि पति ने उसे वापस लाने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया।