
बिलासपुर। अब शहर का ऐसा कोई मोहल्ला या गली नहीं है, जहां आवारा कुत्ते न हो। शहर के सड़कों से लेकर छोटे से छोटे गली मोहल्ले में इनका आतंक चल रहा है। जो हर दिन हर मोहल्ले-गली में किसी न किसी को काटते जरुर है। लगातार इनका आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार नगर निगम इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दे रहा है, जिसकी वजह से डाग बाइट के मामले बढ़ने के साथ ही इनकी संख्या में तेज गति से बढ़ते ही जा रही है।
निगम के आकड़ों के मुताबिक ही शहरी क्षेत्र में लगभग साढ़े आठ हजार कुत्ते है, इनकी संख्या से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि इन्हें पकड़ा नहीं गया और संख्या नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो यह शहरवासियों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर सामने आएगा, वैसे अभी भी यह डागबाइट करते हुए लोगों को परेशान ही करने का काम कर रहे है। शहर की गली मोहल्लों में आवारा कुत्तों का झुंड देखा जा सकता है। कई चौक-चौराहें में कुत्तों का झुंड आक्रमक होता है जो बाइक सवार, पैदल राहगीर या चारपहिया वाहनों के पीछे दौड़ते हैं, इसकी वजह से कई बार दुर्घटना का शिकार भी होते हैं। यह हाल शहर व ग्रामीण अंचल दोनों जगहों में है। लगातार बढ़ रहे कुत्तों के हमले को लेकर लोगों का यह कहना है कि मांस मटन की दुकानें इसका बड़ा कारण है। इन दुकानों के संचालकों द्वारा दुकान से निकले अपशिष्ट को जहां तहां फेंक दिया जाता है। अपशिष्ट को लेकर कुत्तों में लड़ाईया होती रहती है और यह आक्रमक रवैया अपनाने लगते है और धीरे-धीरे इनका आक्रमक रवैया लोगों के खिलाफ में भी देखने को मिलता है और परिणाम स्वरूप डाग बाइट के मामले बढ़ते ही जा रहे है। यदि जल्द ही इनके नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है और इनका आवारा आतंक और भी बढ़ सकता है।
शहर के इन गली मोहल्लों में बने हुए आतंक का पर्याय
शहर के तालापारा, जरहाभाठा, तारबहार, कुदुदंड, डबरीपारा, नेहरू नगर, शांति नगर, भारतीय नगर, विनोबा नगर, विद्या नगर, जूना बिलासपुर, दयालबंद, सिंधी कालोनी, रेलवे कालोनी, हेमूनगर, रेलवे परिक्षेत्र, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र आदि मोहल्ले ऐसे है, जिनके लगभग हर गली में आवारा कुत्ते मिलते है, जो झुंड बनाकर रहते है और किसी पर हमला करते है तो अकेले नहीं करते है बल्कि कई कुत्ते एक साथ हमला करते है, ऐसे में डागबाइट से बचना संभव नहीं हो पाता है।
कुत्तों के सक्रिय है 100 से ज्यादा झुंड
जानकारी के मुताबिक शहर अंर्तगत 100 से ज्यादा बड़े झुंड है। इन झुंड में कम से कम डेढ़ से दो दर्जन तक के कुत्ते रहते है, साफ है कि एक झुंड में रहने से इसका आतंक भी तेज गति से बढ़ जाता है। जो यदि किसी पर हमला करते है तो एक प्लानिंग के तहत करते है। वही इनके झुंड की संख्या भी लगातार बढ़ते ही जा रही है। इन पर लगाम लगाना बेहद जरुरी हो गया है अन्यथा इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते है।
बुजुर्ग, महिला व बच्चे आसानी से हो जाते है डाग बाइट का शिकार
कुत्ते भी ज्यादातर बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को काटते है, क्योंकि हमला होने की दशा में यह जल्द से जल्द भाग नहीं पाते है और डागबाइट का शिकार हो जाते है। अस्पताल पहुंचने वाले अस्सी फासदी से ज्यादा मामलों में बुजुर्ग, महिला और बच्चे ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते है।