बिलासपुर जिला न्यायालय का बड़ा फैसला, पैतृक जमीन पर बिना सहमति लोन लेना अवैध
बिलासपुर जिला न्यायालय ने एक निर्णय में स्पष्ट किया है कि पैतृक संपत्ति के सह-स्वामी अन्य हिस्सेदारों की सहमति के बिना पूरी जमीन बंधक रखकर लोन नहीं ले...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 22 Oct 2026 09:56:19 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Oct 2026 09:56:19 PM (IST)
HighLights
- पैतृक संपत्ति पर बिना सहमति बंधक लोन अवैध करार।
- एक्सिस बैंक का बंधक समझौता रंजन यादव के हिस्से पर बेअसर।
- अदालत ने कहा- सह-स्वामी केवल अपने हिस्से तक बंधक रख सकता है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: पैतृक संपत्ति के सभी सह-स्वामियों की सहमति के बिना पूरी जमीन बंधक रखकर कर्ज लेने के मामले में जिला न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सह-स्वामी अपनी कानूनी हिस्सेदारी से अधिक संपत्ति बंधक नहीं रख सकता। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत ने सिविल अपील क्रमांक 26ए/2025 में रंजन यादव (मृतक) के कानूनी वारिसों की अपील आंशिक रूप से मंजूर करते हुए कहा कि एक्सिस बैंक के पक्ष में किया गया बंधक उनकी हिस्सेदारी पर बाध्यकारी नहीं होगा।
मामला मस्तूरी तहसील के ग्राम परसोढ़ी स्थित खसरा नंबर 397, 429 और 431/3 की कुल 0.7530 हेक्टेयर पैतृक जमीन से जुड़ा है। अपीलकर्ताओं के अनुसार, दशरथ यादव ने अन्य सह-स्वामियों की सहमति या जानकारी के बिना खुद को पूरी जमीन का एकमात्र मालिक बताकर एक्सिस बैंक की सिरगिट्टी-सिपत रोड शाखा में जमीन बंधक रख दी।
इसके बदले पांच लाख रुपये का कार्यशील पूंजी ऋण और एक लाख रुपये का सावधि ऋण लिया गया। रंजन यादव के कानूनी वारिसों ने जमीन में अपने अधिकार की घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए निचली अदालत में वाद दायर किया था। वहां से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने जिला न्यायालय में अपील की।
मौखिक बंटवारे का दावा साबित नहीं
अदालत ने राजस्व अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। इसमें पाया गया कि दशरथ यादव विवादित जमीन के अकेले मालिक नहीं थे। जमीन में रंजन यादव का भी वैध अधिकार और हित था। मौखिक बंटवारे के जरिए पूरी संपत्ति पर दशरथ यादव का एकाधिकार होने का दावा प्रमाणित नहीं हुआ।
अदालत ने संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 44 के सिद्धांत के अनुसार स्पष्ट किया कि सह-स्वामी अपनी वैध हिस्सेदारी तक ही संपत्ति हस्तांतरित या बंधक रख सकता है। वह दूसरे सह-स्वामियों के हिस्से को उनकी सहमति के बिना बंधक नहीं बना सकता। बाक्स बैंक दशरथ यादव से कर सकेगा वसूली अदालत ने घोषित किया कि रंजन यादव का विवादित जमीन में वैध और निरंतर अधिकार है।
बंधक समझौता उनके हिस्से पर बाध्यकारी नहीं होगा और न ही रंजन यादव या उनके वारिस पांच लाख तथा एक लाख रुपये के ऋण के व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। हालांकि, बैंक को दशरथ यादव से बकाया वसूलने और उनकी वैध हिस्सेदारी के संबंध में कानून के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई है। अदालत ने बैंक और दशरथ यादव को बंधक के आधार पर रंजन यादव के वैध हिस्से को प्रभावित करने या नुकसान पहुंचाने से स्थायी रूप से रोक दिया।