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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शब्द संसार : कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

प्रसिद्ध कवि सोहनलाल द्विवेदी की कविता की ये चंद लाइनें कवि बोधन के जीवन पर सटीक बैठता है

By Radha Krishna SharmaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 08 Feb 2024 03:50:44 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Feb 2024 03:50:44 PM (IST)
शब्द संसार : कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
आल्हा छंद

HighLights

  1. नाम के अनुरूप कर रहे काम
  2. बोधन का कविता संग्रह
  3. छत्तीसगढ़ी छंदबद्ध गुरु वंदना (लावणी छंद)

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। प्रसिद्ध कवि सोहनलाल द्विवेदी की कविता की ये चंद लाइनें कवि बोधन के जीवन पर बैठता है सटीक कवि व साहित्यकार बोधन राम निषाद पेशे से वाणिज्य संकाय के लेक्चरर हैं। साहित्य के प्रति गहरा लगाव व जुड़ाव भी रखते हैं। आप यह पढ़कर अचरज में पढ़ जाएंगे कि ये दिव्यांग हैं। इनकी दिव्यांगता कर्म क्षेत्र में कभी आड़े नहीं आई। या यूं कहें कि इन्होंने कभी अपनी शारीरिक अक्षमता को आगे आने नहीं दिया। ऐसे ही लोगों की कार्यक्षमता और दृढ़ प्रतिज्ञा के चलते ही इतिहास बनता है। बोधन पर सोहनलाल द्विवेदी की वह प्रसिद्ध कविता भी पूरी तरह सार्थक और चरितार्थ होते दिखाई देती है। द्विवेदी जी ने लिखा है-लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।

नन्हीं चीटीं जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर,सौ बार फिसलती है, मन का विश्वास रगों में साहस भरता है, चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखराता है। आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।। सार्थक देती इन चंद लाइनों का जिक्र इसलिए भी जरूरी है कि बोधन राम निषाद दिव्यांग हैं। जन्म से ही वे इस परेशानी को झेल रहे हैं। व्हील चेयर ही उनकी जिंदगी है। जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा व्हील चेयर के सहारे ही वे तय कर रहे हैं। साहस देखिए उन्होंने जमकर पढ़ाई की और हायर सेकेंडरी स्कूल में वाणिज्य संकाय के लेक्चरर हैं।


दिव्यांगता को उन्होंने अभिशाप नहीं माना। एक चुनौती के रूप में लिया और आगे बढ़ते चले गए। पेश से लेक्चरर बोधन राम ने अपने मन की भावनाओं को कागज पर उतारने का काम प्रारंभ किया। वर्ष 2017 से लेखन के क्षेत्र में उन्होंने कलम थामी। जो आजतक अनवरत जारी है। अब तक एक दर्जन से अधिक किताबों का प्रकाशन हो गया है। हिन्दी के अलावा छत्तीसगढ़ी में भी उनकी कलम उसी गति से चल रही है। समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं।

नाम के अनुरूप कर रहे काम

बोधन का समानार्थी शब्द है जताना, सूचित करना, जगाना। शारीरिक अक्षमता के बाद वे समाज को नई दिशा देने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। कविता व साहित्य सृजन के जरिए एक नई दिशा देने का काम निरंतर कर रहे हैं। पेशे के प्रति उतना ही गंभीर हैं जितना साहित्य सृजन को लेकर। वे बताते हैं कि व्हील चेयर में रहने के बाद भी उनका साहस और काम करने का लगन कभी कम नहीं हुआ है। होगा भी नहीं।

बोधन का कविता संग्रह

देश हमारा युगों युगों से कहते आये, हिन्दुस्तान हमारा है।

देश हमारा सबसे प्यारा, विश्व गगन का तारा है।।

ज्ञान और विज्ञान यहीं से, सब देशों ने पाए हैं।

इसकी महिमा ऋषि मुनियों ने, वेद शास्त्र में गाएँ हैं।।

गं गा यमुना और नर्मदा, बहती सुन्दर धारा है।

देश हमारा सबसे प्यारा.............

आज हिमालय भी गाता है, देश-प्रेम मीठी वाणी।

वीर शहीदों की कुर्बानी, दे दी जो अपने पाणी।।

हेमराज उत्तुंग शिखर जो, रक्षक प्राण अधारा है।

देश हमारा सबसे प्यारा.........

जाति पांति का भेद नही है, रहते भाई - भाई हैं।

हिंदू मुस्लिम गले मिले हैं, साथी सिख ईसाई हैं।।

मंदिर मस्जिद है गुरुद्वारा, गिरिजा घर भी प्यारा है।

देश हमारा सबसे प्यारा........

अमर रहे गणतंत्र हमारा अमर रहे गणतंत्र हमारा, जन-गण-मन का नारा है ।

आसमान पर देख तिरंगा, विश्व गगन का तारा है।।

सदियों से हम ठोकर खाएं, मिली आज आजादी ये।

चलो सहेजे अपनी धरती, अब मत हो बर्बादी ये।।

वसुंधरा माँ की आंचल को, हमने आज संवारा है।

अमर रहे गणतंत्र हमारा....

शष्य श्यामला हरी-भरी हो, बंजर धरती की क्यारी।

जय जवान का नारा गूँजे, अमन चैन की किलकारी।।

है सशक्त विज्ञान हमारा, दुश्मन को ललकारा है।

अमर रहे गणतंत्र हमारा...........

वीर शहीदों वाली धरती, रक्षा भार उठाना है।

आज तिरंगा हाथ लिए हम, बलिदानी बन जाना है।।

सीमा पार न आये कोई, अब जय घोष हमारा है।

अमर रहे गणतंत्र हमारा..............

छत्तीसगढ़ी छंदबद्ध गुरु वंदना (लावणी छंद)

हे गुरुवर जी हाथ जोर के, तुंहरे गुन ला गावंव मय।

भवसागर के पार करइया, चरनन माथ नवावव मय।।

अँगरी धर के तहीं सिखाए, आखर चिनहा पाए हंव।

मँय अड़हा अज्ञानी गुरुवर, मन मा आस जगाए हँव।।

तुँहर चरन रज चंदन जइसे, मूड़ी माथ लगावव मय।

हे गुरुवर जी.......................

ज्ञान बिना अंधियारी ये जग, भटकत दुनिया सारी हे।

तहीं हाथ धर ज्ञान बताए, तन मन मा उजियारी हे।।

ज्ञान भक्ति पबरित महिमा ला, जन-जन मा बगरावँव मँय।

हे गुरुवर जी...................

हरि दरशन रद्दा देखइया, जिनगी सुफल बनाए हंव।

विपदा भारी कतको आए, मन मा धीर बंधाए हंव।।

तुंहरे चरन छोड़ गुरुवर जी, कोन डहर अब जावव मय।

हे गुरुवर जी............ .

जानिए बोधन राम निषाद को शिक्षा- एम काम वाणिज्य, डीएड व्यवसाय- व्याख्याता वाणिज्य विभाग

सम्मान- छंद के छ स्थापना दिवस समारोह सिमगा द्वारा सम्मान पत्र 2018 छत्तीसगढ़ कलमकार मंच द्वारा सम्मान पत्र 2018 उम्मीद की किरण - साहित्य मंच गुजरात द्वारा साहित्य तुलसी सम्मान 2018 कृति कला साहित्य सम्मान समारोह , सीपत,जिला-बिलासपुर द्वारा कृति सारस्वत सम्मान 2018 प्रजातंत्र का स्तंभ समूह द्वारा प्रदत्त सम्मान प्रजातन्त्र का स्तंभ गौरव 2019 छन्द के छ तीसरा स्थापना दिवस सम्मान जिला-कबीरधाम 2019 हिंदी भाषा डाट काम,इंदौर म.प्र.द्वारा- अभिनन्दन पत्र -2019 राष्ट्रिय कवि चौपाल कोटा,राजस्थान द्वारा- राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान - 2019 वक्ता मंच रायपुर द्वारा - कलमकार सम्मान पत्र 2020 छत्तीसगढ़ केवट(निषाद) साहित्य परिवार द्वारा - वीरांगना बिलासा देवी साहित्य सम्मान 2022 छंद के छ के द्वारा छत्तीसगढ़ी छंद रतन सम्मान 2022 भारत को जाने महाकाव्य में मेघालय राज्य की प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन दोहा और चौपाइयों के माध्यम से करने के लिए इंडिया बुक आफ रिकार्ड 2022 और वर्ल्ड बुक आफ रिकार्ड 2022. छंद के छ के द्वारा छत्तीसगढ़ी छंद रतन सम्मान 2023

प्रकाशित पुस्तकें

  • छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह- मोर छत्तीसगढ़ के माटी (2018)
  • हिंदी गज़ल संग्रह - यार तेरी क़सम (2019) 0 छत्तीसगढ़ी भजन संग्रह- भक्ति के मारग (2020)
  • छत्तीसगढ़ी छंद संग्रह अमृतध्वनि (2021)
  • छत्तीसगढ़ी छंद संग्रह- छंद कटोरा (2022)
  • छत्तीसगढ़ी छंद संग्रह - हरिगीतिका छंद (2023)
  • छत्तीसगढ़ी - आल्हा छंद जीवनी (2023)
  • छत्तीसगढ़ी छंद संग्रह- त्रिभंगी छंद (पाण्डुलिपि) छत्तीसगढ़ी बाल कविता संग्रह- चंदा मामा (पाण्डुलिपि)
  • छत्तीसगढ़ी गज़ल संग्रह- मया के फूल (पाण्डुलिपि)