
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। जमीन के बकाया तीन लाख रुपये मांगने पर हुए विवाद में अपने साले की हत्या करने और शव जलाकर साक्ष्य मिटाने के मामले में अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश अनिल प्रभात मिंज की अदालत ने आरोपी अनूप कुमार वर्मा को दोषी ठहराया है। फैसले में अदालत ने उसे हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और साक्ष्य छिपाने के मामले में सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन के अनुसार, मृतक सूरज लोधी ने अपनी 30 डिसमिल जमीन आरोपी अनूप कुमार वर्मा को बेची थी। इसके तीन लाख रुपये बकाया थे। इसी रकम को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। 15 अप्रैल 2023 को ग्राम निगारबंद में मनोज गुप्ता के खेत स्थित मकान में सूरज ने बकाया रकम मांगी तो दोनों के बीच विवाद हो गया।
अभियोजन की कहानी के मुताबिक, सूरज ने गुस्से में कीटनाशक दवा पी ली थी। इसके बाद आरोपी को आशंका हुई कि सूरज उसे फंसा देगा। आरोप है कि अनूप ने बीयर की बोतल से उसके सिर के पिछले हिस्से पर वार किया और बोरी से मुंह-नाक दबाकर उसकी हत्या कर दी। अगली सुबह 16 अप्रैल को आरोपी ने शव को घसीटकर खेत में ले जाकर पैरा डालकर जला दिया। खून लगी बोरी सहित अन्य साक्ष्य भी नष्ट करने की कोशिश की।
मामले में चिकित्सक डॉ. शुभांगी गौरहा के शव परीक्षण प्रतिवेदन में मृतक के सिर के पिछले हिस्से में गंभीर चोट और फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। मृत्यु का कारण दम घुटने के साथ शरीर का जलना बताया गया। चश्मदीद गवाह नीलकंठ कश्यप की गवाही से आरोपी द्वारा शव को खेत में ले जाकर जलाने की बात सामने आई। एफएसएल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को भी अदालत ने अभियोजन के पक्ष में महत्वपूर्ण माना।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर इसे गैर-इरादतन हत्या नहीं, बल्कि हत्या और उसके बाद साक्ष्य मिटाने का अपराध माना। अनूप को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 201 के तहत सात साल का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड दिया गया है। दोनों अर्थदंड जमा नहीं करने पर प्रत्येक धारा में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
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