नईदुनिया प्रतिनिधि,बिलासपुर: अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) से लगे कोटा थाना क्षेत्र के दवनपुर गांव में शनिवार सुबह एक बड़ी घटना सामने आई है। खेत में काम कर रहे एक ग्रामीण पर बाघिन ने अचानक हमला कर दिया। गनीमत रही कि ग्रामीण ने हिम्मत दिखाते हुए पास रखे लोहे के तसले से बाघिन के सिर पर वार कर दिया, जिससे बाघिन भाग गई और ग्रामीण की जान बच गई।
घायल ग्रामीण को फिलहाल गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है। कोटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के दौरान घायल संजू मरकाम ने नईदुनिया से बातचीत में अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह लगभग साढ़े नौ बजे वे अपने खेत में काम करते हुए खाद डाल रहा था।
इसी दौरान अचानक खेत में एक बाघिन नजर आई और मैं कुछ कर पाता, उससे पहले ही उसने मुझपर हमला कर दिया। संजू ने बताया कि बाघिन ने मेरे बाएं पैर, चेहरे और हाथ पर हमला कर दिया। इसके बाद उसने मेरे गले पर वार करने की कोशिश की।
अपनी जान बचाने की आखिरी कोशिश करते हुए मैने पास ही रखे लोहे का तसला उठाया और पूरी ताकत से बाघिन के सिर पर दे मारा। तसले के वार से बाघिन थोड़ा पीछे हटी। इसी बीच, खेत के आसपास काम कर रहे अन्य ग्रामीण शोर मचाते हुए मौके की ओर दौड़े। इंसानों की आहट और शोरगुल सुनकर बाघिन वापस जंगल की ओर भाग निकली।
खतरे से बाहर है घायल की स्थिति
कोटा बीएमओ डा़ निखलेश गुप्ता ने बताया कि घायल ग्रामीण की स्थिति फिलहाल सामान्य और खतरे से बाहर है। उनके बाएं चेहरे, हाथ और पैर पर नाखून के निशान और हल्की चोटें (लेसेरेटेड इंजरी) आई है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी अस्पताल पहुंच गए और उनकी देखरेख में घायल को गनियारी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इस हमले के बाद से दवनपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है।
तखतपुर क्षेत्र में हो चुकी है घटना
अचानकमार टाइगर रिजर्व और उससे सटे मैदानी इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। इससे पहले तखतपुर क्षेत्र में भी बाघिन के हमले से एक ग्रामीण की मौत का मामला सामने आ चुका है। इस ताजा घटना के बाद से एक बार फिर वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा और सतर्कता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
अचानकमार टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में बढ़ी दहशत
दवनपुर गांव में हुई इस घटना के बाद से एटीआर से लगे दर्जनों गांवों में दहशत का माहौल है। मवेशी चराने और खेतों में जाने वाले किसान अब अकेले जाने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ठंड और गर्मी के दिनों में वन्यजीवों का पानी और भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों की तरफ रुख करना आम हो गया है, लेकिन वन विभाग की ओर से पर्याप्त सुरक्षा या चेतावनी के इंतजाम नहीं किए जाते हैं।
पीपरखुंटी में भी मिले है पगमार
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अचानक से लगे ग्राम पीपरखुंटी के पास भी बाघिन के पगमार मिले हैं। इससे इस गांव में भी दहशत फैल गया है। बताया जा रहा है कि यह बाघ पिछले कुछ दिनों से गांव से लगे घने क्षेत्र में सक्रिय है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी इसके हमले के आशंका को दरकिनार नहीं किया जा सकता है।
वन विभाग की टीम कर रही है मानिटरिंग
घटना की सूचना मिलते ही अचानकमार टाइगर रिजर्व और वन मंडल की संयुक्त टीमें हरकत में आ गई है। वन अधिकारियों के मुताबिक, बाघिन की मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
साथ ही, विभाग ने प्रभावित इलाके के किसानों से अपील की है कि वे सुबह और शाम के वक्त अकेले खेतों में न जाएं और झुंड में काम करें। वर्जन घायल की हालत सामान्य है। उसने बताया कि बाघिन ने उस पर हमला किया। हाथ, पैर, चेहरे पर हमले का निशान है। गांव में अलर्ट किया गया है। वही सर्चिंग तेज कर दी गई है। कन्हाई दास मानिकपुरी, डिप्टी रेंजर, वन विभाग