
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोरबा जिले में पदस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह के स्थानांतरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। राज्य सरकार द्वारा 16 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत उनका तबादला कोरबा से जिला गरियाबंद किया गया था। याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता नरेंद्र मेहेर के माध्यम से इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता को बड़ी राहत प्रदान की है।
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने तर्क प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता की पहली नियुक्ति वर्ष 2006 में जशपुर जिले में हुई थी। इसके बाद वे रायगढ़ और कोरबा जिले में पदस्थ रहे।
इस प्रकार अपनी पूरी सेवा अवधि में वे 16 वर्ष 7 माह से अधिक समय अनुसूचित क्षेत्रों में ही अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके बावजूद शासन द्वारा उन्हें पुनः एक अनुसूचित क्षेत्र से दूसरे अनुसूचित क्षेत्र गरियाबंद में स्थानांतरित करना छत्तीसगढ़ शासन के 3 जून 2015 के सर्कुलर की कंडिका 1.3 और 2.1 का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें अनुसूचित क्षेत्रों में सेवा दे चुके अधिकारियों को गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ करने का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त, अधिवक्ताओं ने कोर्ट को अवगत कराया कि गरियाबंद जिले में सहायक जिला आबकारी अधिकारी का केवल एक ही पद स्वीकृत है, जिस पर पदस्थ लाल जी दीवान का कबीरधाम स्थानांतरण होने पर उन्होंने भी हाईकोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया है। ऐसे में गरियाबंद में कोई पद रिक्त ही नहीं है।
उच्च न्यायालय ने इन आधारों पर स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह को 10 दिवस के भीतर वरिष्ठ सचिवों की उच्चस्तरीय समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जब तक समिति द्वारा अभ्यावेदन का अंतिम निराकरण नहीं कर लिया जाता, तब तक स्थानांतरण आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी।
16 साल की सेवा का गणित, गरियाबंद में पद न होने का पेंच और हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
16 वर्ष 7 माह अनुसूचित क्षेत्रों में दी सेवा: राकेश कुमार सिंह 2006 से 2011 तक जशपुर, 2016 से 2022 तक रायगढ़ और 2022 से अब तक कोरबा (सभी अनुसूचित क्षेत्र) में पदस्थ रहे।
3 जून 2015 के सरकारी सर्कुलर का उल्लंघन: शासकीय नियमों के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र में निर्धारित अवधि पूरी करने के बाद गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थापना पर विचार किया जाना अनिवार्य है।
गरियाबंद में पद रिक्त ही नहीं था: गरियाबंद में स्वीकृत एकमात्र पद पर पदस्थ लाल जी दीवान के तबादले पर भी हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा दी थी, जिससे वहां कोई पद खाली नहीं था।
हाईकोर्ट का अंतिम निर्देश: याचिकाकर्ता 10 दिनों में वरिष्ठ सचिवों की समिति के समक्ष अभ्यावेदन पेश करेंगे। समिति का फैसला आने तक स्थानांतरण आदेश पूरी तरह स्थगित रहेगा।