बिलासपुर। शहर व आसपास के 93 ग्राम पंचायतों को नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने निवेश क्षेत्र के दायरे में लाते हुए इसकी घोषणा कर दी है। इसमें खमतराई, कोनी, मंगला, कछार और अमसेना जैसी बड़ी ग्राम पंचायतें भी शामिल हैं। निवेश क्षेत्र घोषित करने का मतलब साफ है कि अब यहां के ग्रामीणों को भूमि उपयोगिता(लैंड यूज) के संबंध में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से अनुमति लेनी होगी। अपनी मनमर्जी से अपनी ही जमीन की उपयोगिता तय कर सकते हैं और न ही किसी तरह का निर्माण कार्य कर सकेंगे।
राज्य शासन ने जिले के नगरीय निकायों के अलावा ग्राम पंचायतों को निवेश क्षेत्र घोषित कर दिया है। नगर निगम के अलावा कोटा,मस्तूरी व बिल्हा ब्लाक मुख्यालय से लगे 93 गांवों को भी निवेश क्षेत्र की सूची में शामिल किया गया है। शासन स्तर पर दिशा निर्देश जारी होने के बाद ग्रामीणों को नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के नियमों व मापदंडों का पालन करना जरूरी हो जाएगा।
भूमि उपयोगिता के संबंधमें नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से अनुमति लेनी होगी। निवेश क्षेत्र के लिए शासन का मापदंड जारी होने के बाद जमीन की उपयोगिता के संबंध में शासन द्वारा तय किए गए मापदंड के आधार पर उपयोग किया जाएगा। जमीनों का निर्धारण के अनुसार ही कामकाज किया जाएगा। मसलन कृषि, व्यवसायिक और आवासीय के साथ ही खेल मैदान, स्कूल, अस्पताल या अन्य कार्यों के लिए जिस जमीन की मार्किंग की जाएगी वहां उसी अनुस्र्प कार्य किए जाएंगे। उपयोगिता नहीं बदली जाएगी।
14 सड़कें व्यावसायिक घोषित
मास्टर प्लान में 62 गांवों को शामिल किया गया है। 14 सड़कों को कमर्शियल घोषित किया गया है। मास्टर प्लान में यातायात व आवागमन के लिए तीन बाइपास सड़क प्रस्तावित किया गया है। दो फ्लाई ओवर के साथ ही अरपा नदी पर तीन स्थानों में ब्रिज निर्माण भी प्रस्तावित किया गया है। मंगला, सीपत टेलीफोन एक्सचेंज, लिंक, श्रीकांत वर्मा मार्ग, व्यापार विहार, रिंग रोड दो उसलापुर के अलावा बिलासपुर रायपुर नेशनल हाईवे के अलावा पंडिरया बिलासपुर और मुंगेली नांदघाट रोड़ को कमर्शियल घोषित किया गया है।