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व्यापार विहार प्लाट आवंटन: सुप्रीम कोर्ट से अमरीती अग्रवाल को झटका, नगर निगम का फैसला बरकरार

व्यापार विहार कमर्शियल प्रोजेक्ट में प्लाट आवंटन की निविदा रद करने के मामले में अमरीती अग्रवाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। बिलासपुर नगर निग...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sat, 08 Aug 2026 09:47:48 AM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 09:50:49 AM (IST)
व्यापार विहार प्लाट आवंटन: सुप्रीम कोर्ट से अमरीती अग्रवाल को झटका, नगर निगम का फैसला बरकरार
व्यापार विहार प्लाट आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से अमरीती अग्रवाल को झटका (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. व्यापार विहार प्लाट आवंटन: टेंडर रद करने का फैसला सुप्रीम कोर्ट से बरकरार
  2. एच-1 बोलीदाता होने मात्र से संपत्ति पर अधिकार नहीं, आदेश में दखल से इनकार
  3. अमरीती अग्रवाल ने पहले इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। व्यापार विहार कमर्शियल प्रोजेक्ट में प्लाट आवंटन की निविदा रद करने के मामले में अमरीती अग्रवाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। बिलासपुर नगर निगम द्वारा टेंडर प्रक्रिया रद करने के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए टेंडर रद करने के निर्णय को बरकरार रखा है। यह आदेश सात अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने पारित किया।

मामला व्यावसायिक प्लाटों के आवंटन से जुड़ा है

मामला व्यापार विहार कमर्शियल प्रोजेक्ट के जोन-1 में व्यावसायिक प्लाटों के आवंटन के लिए वर्ष 2023 में जारी निविदा से संबंधित है। अमरीती अग्रवाल ने प्लाट नंबर बी-108 के लिए बोली लगाई थी, जो लगभग 4000 वर्गफुट का था। बोली प्रक्रिया में सबसे अधिक बोली लगाने के कारण वह एच-1 बोलीदाता बनी थीं। याचिकाकर्ता ने निविदा प्रक्रिया के तहत ईएमडी और प्रारंभिक राशि मिलाकर लगभग 25.20 लाख रुपये नगर निगम के पास जमा किए थे। हालांकि, लंबे समय तक प्रक्रिया लंबित रहने के बाद नगर निगम ने जनवरी 2025 में पूरी निविदा प्रक्रिया को रद कर दिया।


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हाई कोर्ट ने खारिज की थी याचिका

अमरीती अग्रवाल ने इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने 22 जून 2026 को याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि केवल एच-1 बोलीदाता बन जाने से किसी व्यक्ति को संपत्ति पर स्वतः अधिकार नहीं मिलता। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए नगर निगम के टेंडर रद करने के फैसले को कायम रखा है।