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जज साहब... पैर कट गया, अब शादी नहीं होगी, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सुनाया बड़ा आदेश

सड़क हादसे में जांघ से बायां पैर गंवाने वाले महासमुंद जिले के 23 वर्षीय सूरज अग्रवाल को बिलासपुर उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 05:49:48 PM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 05:49:48 PM (IST)
जज साहब... पैर कट गया, अब शादी नहीं होगी, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सुनाया बड़ा आदेश

HighLights

  1. बिलासपुर हाई कोर्ट ने 7.23 लाख रुपये बढ़ाया दुर्घटना मुआवजा।
  2. 23 वर्षीय सूरज अग्रवाल को अब मिलेंगे कुल 48.35 लाख।
  3. विवाह की संभावनाएं प्रभावित होने पर 3 लाख रुपये मंजूर।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: सड़क हादसे में जांघ से बायां पैर कटने से स्थायी रूप से दिव्यांग हुए महासमुंद जिले के सूरज अग्रवाल को हाई कोर्ट ने सात लाख 23 हजार 360 रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि 23 साल की उम्र और शारीरिक स्थिति को देखते हुए विवाह की संभावनाएं प्रभावित होने के लिए भी मुआवजा दिया जाना उचित है।

इससे मुआवजा 41 लाख 12 हजार नौ रुपये से बढ़कर 48 लाख 35 हजार 369 रुपये हो गया। याचिकाकर्ता ने विकलांगता के चलते अपनी याचिका में शादी नहीं हो पाने का जिक्र किया था। छुईपाली, थाना सरायपाली निवासी सूरज अग्रवाल एक जुलाई 2021 को सड़क हादसे में घायल हुए थे इसाके चलते उनका जांघ से बायां पैर काटना पड़ा। चिकित्सकीय मंडल ने 80 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता प्रमाणित की थी, लेकिन डाक्टर के बयान के आधार पर दावा अधिकरण ने उनकी कमाई की क्षमता 100 प्रतिशत प्रभावित मानी थी।


अधिकरण ने 20 नवंबर 2023 को 41.12 लाख रुपये मुआवजा दिया था। सूरज की ओर से अधिवक्ता समीर सिंह ने कहा कि हादसे के समय अकुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी 9,200 रुपये थी, जबकि अधिकरण ने 7,800 रुपये मासिक आय मानी। साथ ही विवाह की संभावनाएं प्रभावित होने के लिए कोई राशि नहीं दी गई।

बीमा कंपनी ने अधिकरण के मुआवजे को उचित बताया। न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने आय 9,200 रुपये मानकर उसमें 40 प्रतिशत भविष्य की संभावित आय जोड़ते हुए कमाई क्षमता के नुकसान का मुआवजा 27.82 लाख रुपये तय किया।

सर्वोच्च न्यायालय के दिव्या मामले का हवाला देते हुए विवाह की संभावनाएं प्रभावित होने के लिए 3 लाख रुपये भी मंजूर किए। बढ़ी हुई 7.23 लाख रुपये राशि पर दावा आवेदन की तारीख से वसूली तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा। रजिस्ट्री को पीड़ित को बढ़ी राशि की जानकारी हिंदी में देने के निर्देश भी िदए गए है।