
दंतेवाड़ा। जिले के गदापाल की मासूम की मौत जापानी बुखार एनसेफेलिटिस से होने की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य अमला सकते हैं। विभाग टीम अब गांव की घेराबंदी कर घर-घर दस्तक दे रही है। पिछले तीन दिन से गांव के करीब 400 घरों में 18 लोगों की टीम बुखार पीड़ित बच्चे और परिजनों का बायोडाटा ले रही है। इतना ही कैंप लगाकर बच्चों सहित अन्य लोगों का उपचार भी किया जा रहा है।
पड़ोसी जिले सुकमा और बीजापुर के बाद दंतेवाड़ा में भी एनसेफेलिटिस की दस्तक हो चुकी है। पिछले दिनों मेकॉज में उपचार के दौरान गदापाल की तीन वर्षीय मासूस रानी मंडावी की मौत इसी बुखार के बाद हुआ है। इसके बाद विभाग ने गदापाल सहित आसपास स्वास्थ्य शिविर लगाने के साथ ही सर्वे और जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार पिछले तीन दिन से डॉक्टर सहित सुपरवाइजर, तकनीशियन और अन्य लोगों के 18 सदस्यीय टीम गांव में जुटी है। टीम घर-घर दस्तक देकर बच्चों सहित लोगों की जानकारी ले रही है। लोगों से पूछा रहा है कि आपके परिवार में कौन, कब, कहां प्रवास पर था।
यदि कोई सुकमा जिले या ओडिशा के मलकानगिरी की ओर प्रवास किया था तो उस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि अब तक बुखार पीड़ित किसी भी में मलेरिया या एनसेफेलिटिस के लक्षण नहीं पाए गए हैंं। बावजूद टीम सतर्कता बरत रही है। कैंप में ग्रामीणों के बीमारी और उसके लक्षण बताए जा रहे। शिविर में पहुंचे अन्य लोगों का भी टीम स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरी दवा और सलाह दे रहे हैं।
इनका कहना है
गदापाल में जापानी बुखार से मौत की पुष्टि मेकॉज से हुई है। इसके बाद गांव में सर्वे किया जा रहा है। अभी तक इस बीमारी के लक्षण के रोगी नहीं मिले हैं। तीन चरणों में सर्वे और जांच होगी।
-डॉ. गौतम सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी