प्रदीप गौतम/दंतेवाड़ा। Dantewada News: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के विकास के सारे दावे मलगेर नाले में पहुंचकर खत्म हो जाते हैं। नाले में पुलिया नहीं है। अगर ग्रामीण पुलिया व सड़क की मांग करते हैं तो नक्सली सजा देते हैं और यदि नहीं करते तो परेशानी झेलनी पड़ती है। गांव प्रशासन और नक्सलियों के बीच लक्ष्मण रेखा बना हुआ है। इसके बाद भी प्रशासन ने मलगेर नाले में पुल बनने की कभी पहल नहीं की है, जबकि पुल नहीं होने से बारिश में इलाका टापू बन जाता है, जिससे दो ग्राम पंचायत के करीब एक हजार परिवार प्रभावित होते हैं।
दंतेवाड़ा में डीएमफ फंड से फिजूलखर्ची आम बात है, अभी हाल ही में मंदिर कारिडोर में करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप जिला प्रशासन पर लग रहे हैं। बर्रेम के पास मलगेर नाले में पुलिया बनने को लेकर जिला प्रशासन गंभीर नहीं है, जिसका खामियाजा आए दिन इस क्षेत्र के ग्रामीणों को उठाना पड़ता है।
ऐसा ही एक मामला देखने को मिला। रेवाली ताड़पारा के भीमा की इलाज के दौरान गुरुवार रात को मौत हो गई, गांव तक रास्ता नहीं होने की वजह से स्वजन शव को जिला अस्पताल से सुबह शव वाहन में लेकर निकले, पर मलगेर नाले में पुलिया नहीं होने से कड़ाके की ठंड के बीच स्वजन शव को नाले को पार कर कांवड़ में गांव तक ले जाने मजबूर हुए।
जिले के रेवाली और बुरगुम तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। एक तरफ मलगेर नाला है, तो दूसरी तरफ नक्सलियों की बंदिश है। अरनपुर होकर जाने वाली सड़क नक्सलियों ने काट रखी है, जिसकी वजह से बीते कई सालों से इन दोनों गांवों तक वाहनों की आवाजाही बंद है।
बुरगुम, रेवाली के ग्रामीण पुलिया व सड़क की मांग कभी नहीं करते हैं। इसकी मांग करने वालों को सीधे मौत की सजा मिलती है, क्षेत्र में ऐसी घटना हो चुकी है। साल भर पहले ही बर्रेम में सड़क निर्माण शुरू हुआ और सरपंच पति की हत्या कर दी गई थी। बुरगुम, रेवाली जिले का दूसरा अबूझमाड़ बन कर रह गया है। इंद्रावती के पार नदी में पुल बनाने में शासन को कामयाबी मिल गई है, पर मलगेर आज भी नक्सली और विकास के बीच लक्ष्मण रेखा बन कर खड़ा है। नाले के पार आज भी नक्सली अनुमति के बिना कोई काम संभव नहीं है।