
नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का अभियान समाप्त हो चुका है, लेकिन धमतरी जिले के कई किसानों के लिए यह सीजन खुशियों के बजाय चिंता लेकर आया है। धान खरीदी केंद्र डोमा में पंजीकृत ग्राम पंचायत गुजरा के एक किसान चंद्रहास ध्रुव का 120 क्विंटल धान अंतिम दिन तक नहीं बिक सका। अब किसान के सामने बैंक का कर्ज चुकाने और अपनी बेटी की शादी की तैयारियों को लेकर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
पीड़ित किसान चंद्रहास ध्रुव ने बताया कि उन्होंने अपना 120 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए अंतिम दिन तक पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि, सोसायटी के अधिकारी-कर्मचारियों ने यह कहकर धान खरीदने से मना कर दिया कि खरीदी के लिए निर्धारित 'लिमिट' खत्म हो चुकी है। चंद्रहास अकेले ऐसे किसान नहीं हैं; बताया जा रहा है कि डोमा केंद्र के 10 से अधिक अन्य किसान भी इसी तरह की समस्या के कारण अपना धान नहीं बेच पाए और अब केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।
किसान ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि खेती के लिए उन्होंने 60 हजार रुपये का बैंक कर्ज लिया है। उम्मीद थी कि धान बेचकर वे इस कर्ज को चुकता कर देंगे, लेकिन अब धान न बिकने से उन पर ब्याज का बोझ बढ़ेगा। चंद्रहास के लिए स्थिति और भी भावुक है क्योंकि इसी साल उनकी बेटी की शादी तय है। समर्थन मूल्य पर धान की बिक्री न होने से उन्हें भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। वे इस बात को लेकर गहरे तनाव में हैं कि उपलब्ध सीमित संसाधनों से बैंक का कर्ज चुकाएं या बेटी की शादी की खुशियां संवारें।
इस पूरे मामले पर जिला नोडल अधिकारी बीपी गोस्वामी ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित किसान ने टोकन कटवाने में लेटलतीफी की थी। अधिकारी के अनुसार, किसान को 60 क्विंटल धान बेचने का मौका दिया गया था, लेकिन वे पूरे 120 क्विंटल धान एक साथ बेचने की मांग पर अड़े थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कई किसान ऐसे भी होते हैं जो बिना धान बेचे अपना कर्ज जमा करते हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल धमतरी जिले में पंजीकृत कुल 4200 किसानों ने विभिन्न कारणों से अपना धान नहीं बेचा है। इनमें से कई किसान ऐसे हैं जिन्हें तकनीकी खराबी, टोकन की कमी या लिमिट खत्म होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। अब इन किसानों के पास अपना धान खुले बाजार में कम कीमत पर बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।