• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • धमतरी

'बेटी की शादी करूं या कर्ज पटाऊं...', धान नहीं बिकने पर किसान का छलका दर्द, कर्ज से खड़ा हुआ आर्थिक संकट

CG Paddy Procurement: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का अभियान समाप्त हो चुका है, लेकिन धमतरी जिले के कई किसानों के लिए यह सीजन खुशियों के बजाय चिंता लेकर आय...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 31 Jan 2026 06:51:40 PM (IST)Updated Date: Sat, 31 Jan 2026 06:51:40 PM (IST)
'बेटी की शादी करूं या कर्ज पटाऊं...', धान नहीं बिकने पर किसान का छलका दर्द, कर्ज से खड़ा हुआ आर्थिक संकट
धान नहीं बिकने पर किसान का छलका दर्द।

HighLights

  1. सोसायटी की बेरुखी ने बढ़ाई आर्थिक तंगी
  2. 120 क्विंटल धान नहीं बेच पाया किसान
  3. धमतरी जिले में 4200 किसान रह गए वंचित

नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का अभियान समाप्त हो चुका है, लेकिन धमतरी जिले के कई किसानों के लिए यह सीजन खुशियों के बजाय चिंता लेकर आया है। धान खरीदी केंद्र डोमा में पंजीकृत ग्राम पंचायत गुजरा के एक किसान चंद्रहास ध्रुव का 120 क्विंटल धान अंतिम दिन तक नहीं बिक सका। अब किसान के सामने बैंक का कर्ज चुकाने और अपनी बेटी की शादी की तैयारियों को लेकर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

'लिमिट खत्म' होने का हवाला देकर नहीं हुई खरीदी

पीड़ित किसान चंद्रहास ध्रुव ने बताया कि उन्होंने अपना 120 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए अंतिम दिन तक पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि, सोसायटी के अधिकारी-कर्मचारियों ने यह कहकर धान खरीदने से मना कर दिया कि खरीदी के लिए निर्धारित 'लिमिट' खत्म हो चुकी है। चंद्रहास अकेले ऐसे किसान नहीं हैं; बताया जा रहा है कि डोमा केंद्र के 10 से अधिक अन्य किसान भी इसी तरह की समस्या के कारण अपना धान नहीं बेच पाए और अब केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।


कर्ज और बेटी की शादी का दोहरा संकट

किसान ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि खेती के लिए उन्होंने 60 हजार रुपये का बैंक कर्ज लिया है। उम्मीद थी कि धान बेचकर वे इस कर्ज को चुकता कर देंगे, लेकिन अब धान न बिकने से उन पर ब्याज का बोझ बढ़ेगा। चंद्रहास के लिए स्थिति और भी भावुक है क्योंकि इसी साल उनकी बेटी की शादी तय है। समर्थन मूल्य पर धान की बिक्री न होने से उन्हें भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। वे इस बात को लेकर गहरे तनाव में हैं कि उपलब्ध सीमित संसाधनों से बैंक का कर्ज चुकाएं या बेटी की शादी की खुशियां संवारें।

प्रशासन का तर्क: लेटलतीफी और टोकन की समस्या

इस पूरे मामले पर जिला नोडल अधिकारी बीपी गोस्वामी ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित किसान ने टोकन कटवाने में लेटलतीफी की थी। अधिकारी के अनुसार, किसान को 60 क्विंटल धान बेचने का मौका दिया गया था, लेकिन वे पूरे 120 क्विंटल धान एक साथ बेचने की मांग पर अड़े थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कई किसान ऐसे भी होते हैं जो बिना धान बेचे अपना कर्ज जमा करते हैं।

यह भी पढ़ें- नकली खाद-बीज बेचने वालों की अब खैर नहीं, संसद में नया कानून लाएगी केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ में बोले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

जिले के 4200 किसानों ने नहीं बेचा धान

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल धमतरी जिले में पंजीकृत कुल 4200 किसानों ने विभिन्न कारणों से अपना धान नहीं बेचा है। इनमें से कई किसान ऐसे हैं जिन्हें तकनीकी खराबी, टोकन की कमी या लिमिट खत्म होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। अब इन किसानों के पास अपना धान खुले बाजार में कम कीमत पर बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।