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छत्तीसगढ़ में गुजरात के दुग्ध सहकारिता मॉडल को अपनाने की तैयारी, पशुपालन को व्यवसाय बनाने पर जोर

ग्राम पचपेड़ी के समरसता भवन में जिला स्तरीय प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों का एकदिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला संपन्न हुई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने दुग...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 08:54:31 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 08:56:45 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में गुजरात के दुग्ध सहकारिता मॉडल को अपनाने की तैयारी, पशुपालन को व्यवसाय बनाने पर जोर
गुजरात के सहकारिता मॉडल को छत्तीसगढ़ में अपनाने की तैयारी पर आधारित विजुअल। - एआई

HighLights

  1. गुजरात माॅडल अपनाकर सहकारिता को मजबूत करें
  2. पशुपालन को पारंपरिक गतिविधि के बजाय व्यवसाय बनाएं
  3. उत्पादकों को सलाह, उन्नत नस्ल और हरे चारे से घटाएं लागत

नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। ग्राम पचपेड़ी के समरसता भवन में जिला स्तरीय प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों के लिए एकदिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन को पारंपरिक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय इसे पूर्ण रूप से एक लाभकारी व्यावसायिक उद्यम के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में पशुपालन की समृद्ध परंपरा मौजूद है, किंतु इसे अभी तक बड़े पैमाने पर व्यावसायिक स्वरूप नहीं मिल पाया है। इसके लिए हमें देश के अग्रणी गुजरात मॉडल को अपनाकर राज्य में दुग्ध सहकारिता को नई ऊंचाइयां देनी होंगी।


उन्नत नस्ल और प्रबंधन पर जोर

कार्यशाला को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों ने पशुपालकों को अनेक महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां दीं। डॉ. टीआर वर्मा ने कहा कि पशुपालकों को चाहिए कि वे पशुपालन को पूरी तरह एक व्यवसाय मानकर उच्च श्रेष्ठ नस्ल के पशुओं का पालन करें। इसके साथ ही गांवों में उपलब्ध चारागाह भूमि का संरक्षण करना हम सबका दायित्व है।

अपने खेत में उगाएं हरा चारा

उन्होंने बाजार से महंगे पशु आहार खरीदने के बजाय अपने खेतों में हरे चारे की खेती करने को अनिवार्य बताया, क्योंकि हरा चारा पशुपालन की कुल लागत को कम करने में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

धमतरी में 30 हजार दुग्ध उत्पादक

वर्तमान में धमतरी जिले के अंतर्गत कुल 63 दुग्ध समितियों से लगभग 30 हजार किसान प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग दस हजार लीटर दूध का सफल संग्रहण किया जा रहा है। किसानों को दूध के पैसों के भुगतान में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विभिन्न समितियों में आधुनिक माइक्रो एटीएम भी स्थापित किए जा चुके हैं।

क्या है गुजरात मॉडल

गुजरात मॉडल सहकारिता के क्षेत्र में श्वेत क्रांति पर आधारित है, जहां किसानों और दुग्ध उत्पादकों का एक मजबूत नेटवर्क बनाया गया। इसमें बिचौलियों को हटाकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन सीधे उत्पादकों के हाथों में सौंपा जाता है, जिससे पारदर्शिता, आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलता है।