
ुरैना। जिला शिक्षा केन्द्र के डीपीसी ने शनिवार को पहाड़गढ़, कैलारस क्षेत्र के ग्रामीण स्कूलों का भ्रमण किया। इनमें से कई स्कूल बंद मिले और अधिकतर स्कूलों में शिक्षक अनुपस्थित मिले। यह हालात केवल पहाड़गढ़ व कैलारस में नहीं है। तकरीबन पूरे जिले में हैं। यानी ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षक पहुंच ही नहीं रहे हैं। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ाई क्या हो रही होगी। इस बात का अंदाजा तो आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ब्लाक स्तर के बीईओ व बीआरसी अपने क्षेत्रों के स्कूलों का नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। यदि उन्हें स्कूल बंद मिलते हैं या शिक्षक अनुपस्थित मिलते हैं तो वे कार्रवाई करना तो दूर डीपीसी व जिला शिक्षा विभाग को रिपोर्ट तक नहीं देते।
इसलिए शिक्षक नहीं जा रहे स्कूल
- पहले एम शिक्षा मित्र से स्कूल में पहुंचकर ही मोबाइल से उपस्थिति लगाना पड़ती थी, लेकिन एप से उपस्थिति लगाने की अनिवार्यता खत्म होने के बाद शिक्षक पहले की तरह स्कूल नहीं जा रहे हैं।
- जिस स्कूल में दो शिक्षक हैं तो एक शिक्षक एक दिन तो दूसरा शिक्षक दूसरे दिन गायब रहता है। कभी-कभी तो दोनों शिक्षक गायब रहते हैं। ऐसे में स्कूल बंद ही रहता है।
- जिला स्तर के विभागों के बड़े अफसर भी स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए कभी कभार ही जाते हैं। ऐसे में निरीक्षण नहीं होता और शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं होती। इसलिए शिक्षक स्कूल नहीं जाते।
यह हो रहा है असर
- स्कूलों के बंद रहने से बच्चे स्कूल नहीं जाते। नियमित स्कूल जाना भी उनकी आदत में नहीं आ पाता।
- शिक्षकों के अनुपस्थित रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में बच्चों का शैक्षणिक स्तर भी गिरता जाता है।
- स्कूलों में जो नियमित गतिविधियां होती हैं, वे संचालित नहीं हो पाती और बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता।
- स्कूलों में बच्चों को मध्या- भोजन मिलता है, लेकिन स्कूल बंद रहने से मध्या- भोजन का लाभ भी बच्चों को नहीं मिलता। जबकि समूह को मध्या- भोजन का भुगतान नियमित तरीके से होता रहता है।
पहले यह थी व्यवस्था
पहले प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के लिए व्यवस्था की थी कि किसी भी विभाग का अफसर यदि गांव में जा रहा है तो वह आंगनबाड़ी व स्कूल को भी चेक करेगा। इस बात की जानकारी वह जिला स्तर पर बने एक कंट्रोल रूम को मौके से ही देगा। इसके बाद इन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती थी, लेकिन यह व्यवस्था बंद होने से शिक्षक पूरी तरह से निरंकुश हो गए हैं।
कथन
- निरीक्षण में जो स्कूल बंद मिले और जो शिक्षक गैरहाजिर पाए गए, उनके खिलाफ सस्पेंशन व वेतन काटने की कार्रवाई की गई है। साथ ही इस तरह के निरीक्षण स्कूलों के लगातार होते रहेंगे। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को किसी तरह से बक्शा नहीं जाएगा।
एमएस तोमर, डीपीसी, मुरैना