
नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। आसमान से बरसता पानी, बांधों से निकलती जलधारा और उफनती महानदी, शुक्रवार को जिले में बारिश ने ऐसा दृश्य रचा, जिसे देखने के लिए गंगरेल और रुद्री बांध के आसपास लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
बंगाल की खाड़ी से बने अर्नब चक्रवात के प्रभाव से गुरुवार रात से शुरू हुई बारिश शुक्रवार को भी अनवरत जारी रही। नतीजा यह हुआ कि जिले के चारों प्रमुख बांधों में पानी की आवक बढ़ गई और नदी-नाले उफान पर आ गए। नदी-नालों से लगे गांवों में पानी पहुंचने से कई परिवारों को मकान छोड़ना पड़ा, जबकि कई मार्गों पर आवागमन बाधित हो गया।
गंगरेल बांध के कैचमेंट क्षेत्र से करीब दो लाख क्यूसेक पानी की आवक बनी रही। इसे नियंत्रित करने के लिए बांध के सभी 14 गेट खोलकर ढाई लाख क्यूसेक पानी प्रति सेकेंड महानदी में छोड़ा गया। तेज बहाव के साथ निकलते पानी की लहरें 15 से 20 फीट तक उठती नजर आईं। बांध से निकलती जलधारा का यह नजारा लंबे समय बाद देखने को मिला।
गंगरेल बांध में पानी की आवक-जावक पर नजर रखने वाले जानकारों के अनुसार करीब 28 साल बाद बांध के सभी 14 गेटों से ढाई लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। इससे पहले वर्ष 1998 में सभी गेट खोलकर दो लाख 80 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यही वजह रही कि शुक्रवार को गंगरेल बांध का नजारा देखने सुबह से ही लोग पहुंचने लगे।
दोपहर तक भीड़ बढ़ती गई और शाम को वाहनों की रेलमपेल के कारण जाम की स्थिति बन गई। रुद्री बांध के गेट खुलने के बाद महानदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा। नदी के उफान को देखने के लिए लोग पहुंचे। कई लोग मोबाइल से वीडियो और रील बनाते तथा सेल्फी लेते नजर आए।
हालांकि आकर्षक नजारा देखने पहुंची भीड़ के बीच प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था संभाले रखी। बांध और नदी के प्रतिबंधित क्षेत्रों में लोगों को जाने से रोकने के लिए जवान तैनात किए गए।
गंगरेल के साथ मुरुमसिल्ली, दुधावा और सोंढूर बांधों में भी पानी की आवक बढ़ी। शुक्रवार सुबह मुरुमसिल्ली में 7465 क्यूसेक पानी की आवक के मुकाबले 7286 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। दुधावा में 18724 क्यूसेक की आवक और 16606 क्यूसेक की निकासी रही। सोंढूर में 16624 क्यूसेक पानी पहुंच रहा था और 16402 क्यूसेक छोड़ा जा रहा था। चारों जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ गई।
बारिश का असर शहर की सड़कों और बस्तियों पर भी दिखा। जनपद पंचायत से रुद्री रोड, गौरव पथ, अमलतासपुरम कालोनी के पास, बाम्बे गैरेज, बस स्टैंड, शिव चौक गली, रत्नाबांधा रोड और मां दुर्गा मंदिर क्षेत्र में पानी भर गया।
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निचली बस्तियों के कई घरों में पानी घुसा। रुद्री और गोकुलपुर सहित कई कालोनियों में जलभराव के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई। कई पुल-पुलिया और रपटों पर पानी आने से संपर्क भी प्रभावित रहा।
भू-अभिलेख शाखा के अनुसार जिले में एक जून से अब तक 1201 मिमी औसत वर्षा दर्ज हो चुकी है। 25 सितंबर को ही जिले में 90 मिमी औसत वर्षा हुई। तहसीलवार धमतरी में 1280 मिमी, कुरूद में 1186 मिमी, मगरलोड में 1141 मिमी, नगरी में 1256 मिमी, भखारा में 1153 मिमी, कुकरेल में 1141 मिमी और बेलरगांव में 1201 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
लगातार बारिश के कारण शहर में कई दुकानें बंद रहीं। लोगों को छतरी और बरसाती के सहारे घर से निकलना पड़ा। एक ओर बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया, तो दूसरी ओर लंबे अंतराल के बाद बांधों के ऐसे रौद्र रूप ने लोगों को अपनी ओर खींच लिया।