
CG Board Topper: नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। हर रोज पांच से छह घंटे की पढ़ाई कर 10 वीं बोर्ड परीक्षा में आयुष सोनकर ने 97.67 प्रतिशत अंक हासिल कर छत्तीसगढ़ के टाप टेन सूची में सातवां स्थान प्राप्त किया है। वह बायो विषय में आगे की पढ़ाई करके नीट की परीक्षा पास करके डाक्टर बनना चाहते हैं। आयुष की इस बड़ी उपलब्धि से नगर पंचायत कुरूद समेत उनके स्वजनों में काफी खुशी है।
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नौ मई को 10वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी किया। मेरिट सूची के नाम सार्वजनिक किया, जिसमें नगर पंचायत कुरूद के स्वामी आत्मानंद हिंदी मीडियम स्कूल में अध्ययनरत आयुष सोनकर पुत्र राजेश सोनकर का नाम आया।
97.67 प्रतिशत के साथ उनका प्रदेश के टाप टेन सूची में सातवां स्थान आया है। इसकी खबर आयुष व उनके परिवार तथा कुरूद में फैलने के बाद खुशी की लहर छा गई। लोग उनके घर पहुंचकर बधाई देने पहुंचे। वहीं उनके स्वजन मोबाइल पर फोन कर उज्जवल भविष्य की कामना करते रहे।

देर रात तक बधाई का सिलसिला जारी रहा। स्वजन ने आयुष का मुंह मीठाकर कराकर स्वागत किया। क्योंकि आयुष सोनकर के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। नईदुनिया से मोबाइल पर चर्चा करते हुए आयुष सोनकर ने बताया कि मेरिट सूची में जब से नाम आया है, वह बेहद खुश है। उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हर रोज पांच से घंटे तक की पढ़ाई करता था।
अपने बड़े भाई नितिन सोनकर के साथ अपने ही शिक्षक के पास अलग से पढ़ाई करने जाता था, ताकि वह मेरिट में आ सके। मोबाइल से इंटरनेट मीडिया के यू-ट्यूब का पढ़ाई के लिए सहारा लिया। वह आगे बायो विषय लेकर पढ़ाई करेंगे। नीट की तैयारी करके उनका लक्ष्य डाक्टर बनकर सेवा करना चाहते हैं। वहीं आयुष सोनकर के बड़े भाई नितिन सोनकर कक्षा 12वीं में अध्ययनरत था। उनका रिजल्ट भी अच्छा रहा। 85 प्रतिशत हासिल किया है, जिससे वह खुश हैं।
आयुष सोनकर पढ़ाई के साथ-साथ हैंडबाल व क्रिरकेट खेलने में काफी रूचि रखते हैं। वह हैंडबाल के स्टेट लेवल खिलाड़ी हैं। उन्हें कक्षा 10वीं के रिजल्ट में 10 अंक खेल के लिए बोनस मिला है, लेकिन वह मेरिट में नहीं जुड़ पाया है। यदि यह 10 अंक मिलता है, तो उनका प्रदेश में स्थान दूसरा हो सकता है।
आयुष सोनकर के पिता राजेश सोनकर धमतरी मंडी में चपरासी के पद पर पदस्थ है। उनकी मां गृहणी है। उनका बड़ा भाई नितिन सोनकर है। पिता राजेश सोनकर ने बताया कि उनके दोनों पुत्र पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे हैं। वे पढ़ाई के लिए उन्हें प्रेरित करते रहते हैं, क्योंकि वे शुरू से ही शिक्षा को महत्व देते हैं।