
नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के आने के बाद धमतरी जिले में माह भर के दौरान लगभग डेढ़ हजार आवेदन आए हैं। 1500 का आंकड़ा आने के बाद हिंदू संगठन, सर्व आदिवासी समाज, क्रिश्चियन फोरम की कलेक्ट्रेट में बैठक हुई। बैठक प्रार्थना सभा सहित अन्य विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक उपरांत धमतरी शहर के चर्च में ईसाई समाज द्वारा बाकायदा बोर्ड लगाया जा रहे हैं। फिलहाल शहर में स्थित आठ चर्च में यह बोर्ड लगाया जा रहा है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में बीते डेढ़ माह के दौरान धमतरी जिले के तीन अनुभाग से यह आंकड़े मिले हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार नगरी संभाग, धमतरी संभाग तथा कुरुद संभाग से लगभग 15 सौ आवेदन मिले हैं। इनमें अधिकांश अनुसूचित जाति और साहू समाज के आवेदन हैं।
सरकार द्वारा प्रशासन को मिले आवेदन फार्म में आठ बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है,जिसमें अधिकांश आवेदकों ने धर्म सभा में जाने की अनुमति प्रशासन से मांगी है। इसी मामले में बीते दिनों कलेक्टर की अगुवाई में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हिंदू संगठन और ईसाई समाज की बैठक हुई।
बैठक के बाद निर्णय हुआ की ईसाई समाज की प्रार्थना सभा में यदि कोई हिंदु शामिल होता है तो उसे ईसाई माना जाएगा। बैठक समाप्ति के बाद अब चर्च में बाकायदा इससे संबंधित पोस्टर लगाया जा रहा है जिसमें लिखा है कि "चर्च प्रबंधन के नियमानुसार चर्च भवन में आराधना हेतु प्रवेश केवल ईसाईयों के लिए है।अन्य यदि स्वेच्छा से आते हैं तो इसके लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे।"
धमतरी जिला क्रिश्चियन फोरम के संरक्षक डाॅ नीरज नेताम ने बताया कि चर्च की प्रार्थना सभा में किसी के आने पर रोक नहीं है कोई भी परमेश्वर के मंदिर में आकर प्रार्थना कर सकता है। धमतरी शहर में स्थित आठ चर्च समेत जिले में कुल 30 रजिस्टर्ड चर्च हैं।
सर्व आदिवासी समाज जिला-धमतरी के जिलाध्यक्ष जीवराखन मरई ने कहा कि चर्च में बोर्ड लगाने से हमें कोई मतलब नहीं है। हम अपने समाज को एकजुट करने में लगे हुए हैं आदिवासी समाज की रीति संस्कार को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं।
बैठक में हिंदू संगठनों ने मांग की थी कि ईसाई धर्मप्रचारक हिंदुओं के घर जाकर चिकित्सा या अन्य सहायता के नाम पर उनसे मेल मिलाप नहीं बढ़ा सकेंगे।