
नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। धमतरी जिले में शेयर बाजार में ऊंचे रिटर्न और चार से पांच प्रतिशत मासिक ब्याज का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। धमतरी पुलिस ने मुख्य आरोपित को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने धमतरी के साथ ही कई अन्य जिलों के प्रतिष्ठित नागरिकों को भी अपनी ठगी का शिकार बनाया है।
सिटी कोतवाली पुलिस से प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट रोड स्थित वेल्थ ट्रैकर नाम से एक कार्यालय संचालित किया जा रहा था। इसी कार्यालय के माध्यम से धमतरी निवासी विक्रम शाह पिछले कई वर्षों से शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लोगों से भारी मात्रा में राशि जमा करवा रहा था।
आरोपीत का जाल केवल धमतरी तक सीमित नहीं था, बल्कि कोंडागांव, रायपुर और बालोद सहित कुल पांच जिलों के लोग इसके झांसे में आ चुके थे। इस संगठित ठगी का शिकार बनने वालों में समाज के कई प्रतिष्ठित और जिम्मेदार लोग शामिल हैं। इनमें कई न्यायाधीश, डॉक्टर, सरकारी अधिकारी और कर्मचारी, पूर्व सैनिक तथा सेवानिवृत्त शिक्षक भी हैं।
बैंक खाता सीज होने का बहाना बनाकर हुआ फरार
मामले में उस वक्त नया मोड़ आया जब वर्ष 2026 के दौरान मुख्य आरोपित विक्रम शाह ने निवेशकों को यह झूठी कहानी सुनाई कि उसका बैंक खाता सीज हो गया है और उसकी सारी राशि उसमें फंस गई है। इस बहाने के बाद से निवेशकों को मिलने वाला मासिक ब्याज और मूल राशि का भुगतान पूरी तरह से बंद हो गया। जब निवेशकों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए, तो वह टालमटोल करता रहा और झूठे आश्वासन देता रहा।
महीनों बीत जाने के बाद भी जब कोई भुगतान नहीं हुआ, तब निवेशकों को उसके धोखाधड़ी करने का अहसास हुआ। सबसे पहले कुछ पीड़ितों ने गुरुर थाना में इसकी शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद धमतरी शहर के निवेशकों ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई।
इंदौर से हुई मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी
लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर धमतरी पुलिस हरकत में आई और सिटी कोतवाली तथा साइबर सेल की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस लगातार आरोपित की तलाश कर रही थी। इसी बीच तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस को विक्रम शाह की सटीक लोकेशन मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में मिली। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत इंदौर रवाना हुई और वहां सुनियोजित तरीके से घेराबंदी कर मुख्य आरोपित विक्रम शाह को धर दबोचा।
एग्रीमेंट और चेक के जरिए दिया जाता था विश्वास
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपित विक्रम शाह निवेशकों को अपने जाल में पूरी तरह उलझाने के लिए कानूनी दस्तावेजों का सहारा लेता था। वह निवेश करने वालों को बाकायदा एग्रीमेंट और हस्ताक्षरित चेक देता था ताकि लोगों को यह विश्वास रहे कि भविष्य में यदि कोई वित्तीय गड़बड़ी होती है, तो वे उन चेकों के माध्यम से अपनी पूरी रकम सुरक्षित वापस पा सकेंगे।
हालांकि, जब आरोपित फरार हो गया और निवेशकों ने उन चेकों को बैंकों में लगाया, तो वे सभी चेक बाउंस हो गए। बैंक खातों की जांच करने पर पता चला कि आरोपित के खातों में मात्र 19 से 20 रुपये ही शेष बचे थे, जिससे निवेशकों की चिंता और अधिक बढ़ गई।
इस ठगी के खेल में आरोपित ने अपनी मदद के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों की एक टीम तैयार कर रखी थी। शुरुआत में इस टीम के सदस्यों को भारी मुनाफे का लालच देकर बड़ी रकम निवेश कराई गई। जब उन्हें समय पर ब्याज मिला, तो उनका विश्वास और अधिक मजबूत हो गया। इसके बाद आरोपित ने उन्हें दो प्रतिशत कमीशन का प्रलोभन दिया, जिसके लालच में इन लोगों ने अपने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों की गाढ़ी कमाई भी इस फर्जी योजना में लगवा दी।