
धमतरी(ब्यूरो)। ग्राम पंचायतों को ऑनलाइन जोड़ने की प्रक्रिया ने दम तोड़ दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़ने के उद्देश्य से गांव-गांव में बांटे गए कम्प्यूटर इन दिनों ग्राम पंचायतों में धूल खाते पड़े हैं। सालों से इस्तेमाल नहीं होने की वजह से कम्प्यूटर भी खराब होने लगे हैं।
जनकल्याण के लिए शुरू की जाने वाली योजनाएं किस तरह पहले ही चरण में दम तोड़ देती है, इसका नजारा धमतरी जिले के 333 ग्राम पंचायतों में बांटे गए कम्प्यूटर में से अधिकांश को देखकर लगाया जा सकता है।
शासन द्वारा पंचायतों में कम्प्यूटर देने की योजना बनाई ताकि पंचायत में होने वाले कार्यों का हिसाब कम्प्यूटर से किया जाएगा। पंचायत के बंद कमरें में बैठकर सरपंच व सचिवों की मिलीभगत नहीं चलेगी। हर वर्ष पंचायत के सभी कार्यों का हिसाब सचिव तथा रोजगार सहायक के माध्यम से कम्प्यूटर में अपलोड किया जाएगा। इसके लिए प्रिया नामक साफ्टवेयर भी बनाया गया। साफ्टवेयर में स्वीकृत कार्य, राशि, मजदूरी आदि अपलोड होने के बाद हेराफेरी नहीं हो सकेगी। ऐसे में पंचायत के विकास के लिए मिली धनराशि का बेजा इस्तेमाल नहीं होगा। किसी भी तरह की अनियमितता पर सरपंच व सचिव को हिसाब कम्प्यूटर से देना होगा। हर हाल में कम्प्यूटर के माध्यम से पूरा रिकार्ड देना होगा। इससे पंचायत की धनराशि की हेराफेरी पर रोक लगेगी। वहीं माउस के एक क्लिक से पंचायत संबंधी कोई भी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। जानकारी देने से आनाकानी करने वाले सचिवों को ग्रामीणों को भी पूरी जानकारी देनी होगी। साथ ही कम्प्यूटर में अपलोड की सही जानकारी समय-समय पर जनपद पंचायत द्वारा जांच की जाएगी। कलेक्टर एनएस मंडावी ने कहा कि ग्राम पंचायतों में बांटे गए कम्प्यूटर की उन्हें जानकारी नहीं है। इस संबंध में जिला पंचायत से संपर्क करें।
हो रहा उपयोग
जिला पंचायत के सीईओ पीएस एल्मा ने बताया कि 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में कम्प्यूटर का उपयोग हो रहा है। जिन ग्राम पंचायतों में विद्युत की समस्या है, उन्हीं ग्राम पंचायतों में कम्प्यूटर से काम नहीं हो रहा। कम्प्यूटर के बेहतर संचालन के लिए ग्राम पंचायतों में डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति की जा रही है।