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तिलक लगाकर गंगा जल पिलाया तब हुआ पत्नी का अंतिम संस्कार, धमतरी में चार साल पहले ईसाई बना था परिवार

धमतरी के ग्राम भटगांव में मतांतरित परिवार की महिला की मौत के बाद समाजजनों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने की मनाही कर दी। करीब एक घंटे के विवाद के बाद...और पढ़ें

By Rammilan sahuEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 10:20:16 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 10:23:18 PM (IST)
तिलक लगाकर गंगा जल पिलाया तब हुआ पत्नी का अंतिम संस्कार, धमतरी में चार साल पहले ईसाई बना था परिवार
मतांतरित सुरेश धु्रव को तिलक लगाकर घर वापसी कराते हुए समाजजन व हिंदू संगठन के लोगमतांतरित परिवार में महिला की मौत, अंतिम संस्कार को लेकर हंगामा।

HighLights

  1. मतांतरित महिला के अंतिम संस्कार पर हंगामा
  2. विहिप और बजरंग दल ने कराई घर वापसी
  3. हिंदू रीति से हुआ मृतका का अंतिम संस्कार

नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। मतांतरित परिवार में एक महिला की मौत के बाद दूसरे दिन सुबह अंतिम संस्कार को लेकर उनके समाजजनों ने जमकर हंगामा किया। अंतिम संस्कार में शामिल होने की मनाही कर दी। घंटेभर चली बैठक के बाद विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल के पदाधिकारी पहुंचे और मतांतरित सदस्य को गंगा जल पिलाकर व तिलक लगाकार घर वापसी कराई, तब जाकर समाजजन उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

जिला मुख्यालय धमतरी से दो किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भटगांव में सोरम रोड पर बसे सरस्वती धु्रव 28 वर्ष पति सुरेश धु्रव की शनिवार की रात मौत हो गई। दूसरे दिन रविवार की सुबह स्वजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तो उनके समाजजनों ने सालों से मतांतरित होने का आरोप लगाकर अंतिम संस्कार में शामिल होने से इंकार कर दिया और हंगामा शुरू हो गया।


विहिप बजरंग दल ने संभाला मोर्चा

समाजजनों की करीब एक घंटे तक इस मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ, तो समाजजनों ने विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पूर्व जिला अध्यक्ष संदीप अग्रवाल को मौके पर बुलाया। बैठक में परिवार के सदस्य सुरेश ध्रुव समाज की परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए दोबारा समाज के साथ रहने की सहमति मांगी, तो समाज ने घर वापसी की शर्त रखी।

तिलक लगाकर गंगा जल पिलाया

समाजजनों की मौजूदगी में सुरेश धु्रव को तिलक लगाया गया और पूजा-अर्चना कर गंगा जल पिलाकर भगवान राम की जयकारा कराया गया, तब उनकी घर वापसी हुई और समाजजन उनकी मृत पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए और कई तरह के सहयोग भी किए। हिंदू रीति-रिवाज व समाज के परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।

चार साल से था मतांतरित

बताया गया है कि सुरेश धु्रव का परिवार पिछले चार साल से ईसाई धर्म अपनाया था, लेकिन अब दोबारा नहीं जाने की बात कही है। वह अपनी इच्छा से पुराने धर्म और समाज में वापस आ रहे हैं। समाज के रीति-रिवाजों का पालन करेंगे। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला अध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने कहा कि सुरेश ध्रुव ने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म और समाज के रीति-रिवाजों को स्वीकार करने की बात कही, इसके बाद गंगाजल और पूजा की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें समाज में शामिल किया गया और फिर मृतिका का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से कराया गया।