
नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी पर बने जिले के सबसे बड़े गंगरेल (पंडित रविशंकर शुक्ल) बांध का जलस्तर इन दिनों तेजी से नीचे जा रहा है। कुछ सप्ताह पहले तक लबालब भरे रहने वाले इस विशाल जलाशय में अभी 21.957 टीएमसी पानी ही शेष रह गया है। इसमें से वास्तविक उपयोगी जल की मात्रा केवल 16.886 टीएमसी बची है। यदि पानी की भारी निकासी इसी तरह जारी रही, तो आने वाले ग्रीष्मकाल और रबी सीजन में जल संकट गहराने का खतरा पैदा हो सकता है।
जल संसाधन विभाग के 24 अक्टूबर के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गंगरेल बांध से वर्तमान में प्रति सेकंड 7,044 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि कैचमेंट क्षेत्र से पानी की आवक घटकर मात्र 459 क्यूसेक रह गई है। गौरतलब है कि भादो माह में हुई मूसलाधार बारिश के चलते बांध पूरी तरह भर गया था और सभी गेट खोलकर ढाई लाख क्यूसेक से अधिक पानी बहाना पड़ा था। लेकिन बारिश थमने और पखवाड़े भर से लगातार हो रही सिंचाई व अन्य जरूरतों की निकासी के कारण बांध का जलस्तर तेजी से गिर चुका है।
गंगरेल में घटते जलस्तर के बीच राहत की बात यह है कि जिले के अन्य तीन प्रमुख बांधों में पानी की स्थिति संतोषजनक है। वर्तमान रिकॉर्ड के अनुसार मुरूमसिल्ली बांध में 5.69 टीएमसी, दुधावा बांध में 9.226 टीएमसी तथा सोंढूर बांध में 5.923 टीएमसी पानी मौजूद है। इन बांधों से फिलहाल पानी की निकासी न के बराबर है। जल प्रबंधन प्रणाली के तहत आवश्यकता पड़ने पर दुधावा और मुरूमसिल्ली से सीधे गंगरेल बांध को पानी देकर भरा जाता है, जबकि सोंढूर का पानी दुधावा के जरिए लाया जाता है।
जिले में इस वर्ष अच्छी बारिश होने के कारण किसानों ने आगामी रबी सीजन में धान एवं अन्य फसलों के लिए पानी की मांग शुरू कर दी है। हालांकि गंगरेल के घटते जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है ताकि निस्तारी और पेयजल संकट उत्पन्न न हो।