
दुर्ग। दुर्ग व भिलाई निगम क्षेत्र व इससे सटे क्षेत्रों में डेंगू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग व स्थानीय निकायों की सुस्ती जारी है। अब तक 39 से अधिक डेंगू से संभावित मरीज मिल चुके हैं, जिनका उपचार जारी है। वहीं 15 सितंबर से अब तक रायपुर मेकाहारा भेजे गए 17 में से 14 ब्लड सैंपल में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इस प्रकार जांच के लिए भेजे गए सैंपलों में से 80 फीसद तक में डेंगू पाया गया है। खास बात यह है कि स्वास्थ्य व स्थानीय निकायों की लापरवाही को लेकर जिला प्रशासन भी गंभीर नहीं है। केवल आदेश जारी कर इससे निपटने खानापूर्ति की जा रही है।
17 में से 14 में डेंगू की पुष्टि
इधर 15 सितंबर से अब तक 17 ब्लड सैंपल डेंगू जांच के लिए रायपुर मेकाहारा लैब भेजे गए। 17 सितंबर की शाम इसकी रिपोर्ट आई है, जिसमें 14 ब्लड सैंपलों में डेंगू के लक्ष्ण मिले हैं। जिन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है उनमें नरेंद्र सिंह (50 वर्ष), वार्ड नौ भिलाई निवासी सुंदर लाल भारती (50 वर्ष), मुरमुंदा निवासी खेमलाल सिंह (23 वर्ष), शारदापारा निवासी माही सिंह (7 वर्ष), शारदा पारा निवासी गिरांजलि विश्वकर्मा (21 वर्ष), उषा मोम (40 वर्ष), सुनील सिंह (38 वर्ष), तीरथ (45 वर्ष), धर्मेंद्र (39 वर्ष), वीके चंद्राकर (23 वर्ष), रवींद्र नायक (40 वर्ष), ज्ञानेश्वर कुमार (5 वर्ष), बी ीवास्तव (42 वर्ष), केपी साहू (55 वष) सहित अन्य शामिल हैं।
16 मरीज चंदूलाल में
डेंगू पीड़ितों की संख्या शहर में लगातार बढ़ते जा रही है। चंदूलाल अस्पताल में डेंगू के संभावित 16 मरीज भर्ती हैं। वहीं स्पर्श हॉस्पिटल में नौ, सेक्टर नौ हॉस्पिटल में नौ, अपोलो बीएसआर में चार, आईएमआई खुर्सीपार में एक मरीज भर्जी है। इसके अलावा शासकीय हॉस्पिटलों में डेंगू के संभावित मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं तीन की अब तक डेंगू से मौत हो चुकी है।
डेंगू के लक्षण
सर्दी-खांसी बुखार, सिरदर्द, आंखों में जलन, लाल चकते, ब्लड प्रेशर कम होना इसके लक्षण है। सही इलाज नहीं मिलने पर इसमें मनुष्य की मौत तक हो सकती है। सामान्य तौर पर डेंगू के मच्छरों का प्रकोप दिन के समय अधिक होता है। बीमारी में कमजोरी अधिक आती है। इसलिए ओआरएस घोल के अलावा बुखार आने पर पैरासिटामॉल टेबलेट लेने की सलाह दी जाती है।
शहर में नहीं हो रही फॉगिंग
इधर दुर्ग निगम क्षेत्र में डेंगू के खतरे को अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया है। डेंगू के मच्छर की मौत सफेद धुएं से ही संभव है। इसके लिए अलावा जमा पानी में काला तेल व जिरेटिन के तेल के छि़ डकाव से ही लार्वा को समाप्त किया जा सकता है। इसके बाद भी निगम क्षेत्र में फॉगिंग नहीं की जा रही है। निगम के पास ब़ डी फॉगिंग मशीन है ही नहीं। जो मशीन है, वह भी खराब है। वर्तमान में दो पोर्टल मशीन के भरोसे फॉगिंग का कार्य किया जा रहा है। वहीं भिलाई निगम क्षेत्र में सुविधाओं के बाद भी नियमित रूप से फॉगिंग व काले तेल का छि़ डकाव नहीं किए जाने की खबर है।
सफाई व्यवस्था दुरुस्त करना जरुरी
स्वास्थ्य विभाग अपना काम कर रहा है। नियमित रूप से जांच कर रक्त पट्टिका ली जा रही है। हल्का बुखार होने पर भी लोगों को चिकित्सकीय परामर्श की सलाह दी जा रही है। डेंगू के मच्छर जमा पानी में पनपते है। गंदी-बदबूदार जगह में रहते हैं। ऐसे में सफाई व्यवस्था दुरुस्त होना जरुरी है। निगम को चाहिए कि वह मच्छरों को पनपने का मौका न दे।
डॉ. एसके मंडल, जिला मलेरिया अधिकारी
हमारे पास ब़ डी फॉगिंग मशीन नहीं है, जो थी वह खराब है। नई मशीन के लिए निविदा निकाली गई है। करीब 15 दिन का समय मशीन के आने में लगेगा। जरुरत को देखते हुए बीएसपी से फॉगिंग मशीन की मांग की गई है। 19 सितंबर से उनके द्वारा हमे मशीन उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बाद पूरे शहर में फॉगिंग कराई जाएगी।
एसके सुंदरानी, आयुक्त नगर निगम दुर्ग