
नईदुनिया प्रतिनिधि, गरियाबंद। ओडिशा से लगने वाली छत्तीसगढ़ की सीमा के जंगली रास्तों को तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने की सूचना के बीच एजेंसियों ने डॉग स्क्वायड और टोही ड्रोन के सहारे कार्रवाई तेज कर दी है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) और केंद्रीय व राज्य एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई को सफलता मिली है।
हफ्ते भर के भीतर किए गए तीन ऑपरेशनों में करीब 79 किलो संदिग्ध नाॅरकोटिक्स पदार्थ और 1.47 किलो पैंगोलिन शल्क बरामद किए गए। कार्रवाई के दौरान कुल 8 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इस पूरे मामले में नाॅरकोटिक्स और वन्यजीव तस्करी के संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।
मामले की शुरुआत 10 सितंबर की सुबह उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के सीतानदी रेंज में हुई। बोराई वन जांच चौकी की टीम निगरानी और गश्त कर रही थी। इसी दौरान ओडिशा के नबरंगपुर की ओर से दो लोगों को मोटरसाइकिल पर टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अनधिकृत रूप से प्रवेश करते देखा गया। उनके पास एक बड़ा बैग था। इसके बाद बिरनासिल्ली वन जांच चौकी पर बैरिकेडिंग की गई। टीम ने बैग बरामद कर लिया, जिसमें करीब 31 किलो संदिग्ध नाॅरकोटिक्स पदार्थ/वन उपज और एक मोबाइल फोन मिला। हालांकि दोनों संदिग्ध मोटरसाइकिल समेत फरार हो गए।
जब्त सामग्री और मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों की प्रारंभिक जांच में संदिग्धों की आवाजाही नबरंगपुर के रायघर क्षेत्र से उत्तर प्रदेश तक होने के संकेत मिले। इसी दौरान जांच एजेंसियों को नबरंगपुर क्षेत्र में नाॅरकोटिक्स और वन्यजीव तस्करी के संभावित संबंधों से जुड़े पुराने खुफिया इनपुट भी मिले।
इसके बाद 11 सितंबर को DRI MP-CG और USTR की टीम ने नबरंगपुर जिले के धांध्रा और मेंत्री क्षेत्र में संयुक्त कार्रवाई की। यहां दो संदिग्ध पेडलरों को करीब 48 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ और एक स्कूटी के साथ हिरासत में लिया गया। कार्रवाई में डॉग स्क्वॉड और ड्रोन स्क्वॉड की भी मदद ली गई। पूछताछ और मौके से मिले साक्ष्यों से अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क को लेकर आगे के सुराग मिलने की बात सामने आई।
जांच आगे बढ़ी तो मलकानगिरी जिले के गोविंदपल्ली क्षेत्र में कार्रवाई की गई। यहां करीब 1.47 किलो पैंगोलिन शल्क, तीन मोटरसाइकिल और पांच मोबाइल फोन जब्त हुए। पूछताछ और फॉलोअप तलाशी के बाद पैंगोलिन तस्करी में कथित रूप से शामिल तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में Wildlife Case OR No. 72 of 2026-27 दर्ज किया गया है।
तीनों कार्रवाइयों के क्रम ने जांच का फोकस अब संभावित नारकोटिक्स-वाइल्डलाइफ नेक्सस पर कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार आपराधिक नेटवर्क के बीच अवैध वस्तुओं के आदान-प्रदान यानी बार्टर ट्रेड की संभावना भी जांच के दायरे में है। हालांकि इस संबंध की अभी पुष्टि नहीं हुई है और इसके लिए आगे की जांच व ठोस साक्ष्यों का सत्यापन जरूरी है।
USTR ने कहा है कि वन्यजीव कॉरिडोर और जंगल के रास्तों को तस्करी के ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। एजेंसियों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वित कार्रवाई के जरिए ऐसे अंतरराज्यीय नेटवर्क की पहचान और कार्रवाई जारी रहेगी।