उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका के जंगल में पेड़ों की कटाई का मामला आया सामने, 30 हजार पेड़ कटने का अनुमान
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) के करका क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और वनभूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है।
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 08:50:26 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 08:51:42 PM (IST)
HighLights
- वन विभाग की टीम ने करका क्षेत्र का निरीक्षण किया
- 2017 के बाद वन क्षेत्र के खुले क्षेत्र में बदलने के संकेत मिले
- डिजिटल मैपिंग और मैदानी सत्यापन के बाद स्थिति स्पष्ट होगी
नईदुनिया न्यूज, गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) के करका क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और वनभूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। वन विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार वर्ष 2016 से 2026 के बीच क्षेत्र में करीब 30 हजार पेड़-पौधों के हटाए जाने का अनुमान है।
वहीं जीपीएस आधारित सर्वे में लगभग 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण के संकेत मिले हैं। हालांकि अंतिम क्षेत्रफल का निर्धारण डीजीपीएस और ड्रोन मैपिंग पूरी होने के बाद किया जाएगा।
वन विभाग की टीम ने करका क्षेत्र का निरीक्षण किया
22 सितंबर को वन विभाग की टीम ने करका क्षेत्र का निरीक्षण किया। विभाग के अनुसार इस दौरान 1,100 से अधिक पेड़ों पर गड्लिंग के निशान और बड़ी संख्या में ताजा कटे पेड़ों के ठूंठ मिले। अब जीपीएस, डीजीपीएस, ड्रोन और अन्य डिजिटल तकनीकों से वन क्षेत्र को हुए नुकसान और कथित अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
2017 के बाद वन क्षेत्र के खुले क्षेत्र में बदलने के संकेत मिले
विभाग ने पुराने रिकॉर्ड और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर भी क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन किया है। वर्ष 2006 और 2012 की इसरो सैटेलाइट इमेजरी में यहां घना वन दिखाई देता था। वहीं करीब 2017 के बाद वन क्षेत्र के खुले क्षेत्र में बदलने के संकेत मिले। मैदानी सत्यापन और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर ही पेड़ों की कटाई का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है।
विस्थापन के बाद फिर अतिक्रमण का दावा
करका सोंढूर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में स्थित वन ग्राम था। बांध निर्माण के बाद 1980 के दशक में गांव का विस्थापन किया गया था। विभागीय रिकार्ड के अनुसार 55 लोगों को मुआवजा दिया गया था। इसके बावजूद बाद में वनभूमि पर दोबारा कथित अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की गतिविधियां सामने आने की बात वन विभाग ने कही है।
वर्ष 2016 में करीब 22 हेक्टेयर वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण के मामले में 22 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था।
अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम का ग्रामीणों ने किया विरोध
22 सितंबर के निरीक्षण के दौरान वन विभाग की टीम को कथित विरोध का सामना करना पड़ा। विभाग के अनुसार करीब 50 से 60 ग्रामीणों ने टीम को सरकारी कार्रवाई से रोकने की कोशिश की। इस दौरान धक्का-मुक्की और हाथापाई की स्थिति बनने की बात कही गई है। विभाग ने घटनाक्रम की वीडियोग्राफी कराई है।
इसके बाद 23 सितंबर को मुकेश मरकाम, केशनाथ उर्फ गोलू सहित अन्य के खिलाफ पीओआर क्रमांक 20/17 दर्ज किया गया। विभाग के अनुसार घटना में किसी अधिकारी या कर्मचारी के घायल होने की सूचना नहीं है।
वन्यजीवों और हाथियों के आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र
करका का जंगल वन्यजीवों और हाथियों के आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया है। वन क्षेत्र के टूटने से वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित होने और आसपास के गांवों में मानव-हाथी संघर्ष की आशंका बढ़ने की चिंता जताई जा रही है।
डिजिटल मैपिंग और मैदानी सत्यापन के बाद स्थिति स्पष्ट होगी
यूएसटीआर के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में करीब 1,050 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि मुक्त कराई जा चुकी है। अब करका क्षेत्र में डिजिटल मैपिंग और मैदानी सत्यापन के बाद वास्तविक नुकसान व अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट होगी।
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