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छत्तीसगढ़ में पोस्टमार्टम के बाद घंटों तक शव वाहन का इंतजार, टूटी उम्मीद तो बल्ली से बांधकर शव ले गए परिजन

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली उजागर हुई है। बरदुला जंगल में मिले कमार जनजाति के सुमेर सिंह के शव का पो...और पढ़ें

By PULAST SHARMA NEWS AGENCYEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sat, 03 Oct 2026 08:27:14 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Oct 2026 08:50:36 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में पोस्टमार्टम के बाद घंटों तक शव वाहन का इंतजार, टूटी उम्मीद तो बल्ली से बांधकर शव ले गए परिजन
गरियाबंद में शव को बल्ली से बांधकर ले जाते ग्रामीण। - ग्रामीण

HighLights

  1. तीन घंटे इंतजार के बाद नहीं मिला वाहन
  2. बांस की बल्ली पर शव ले गए परिजन
  3. गरियाबंद में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए परिजनों को करीब तीन घंटे तक शव वाहन का इंतजार करना पड़ा। वाहन उपलब्ध नहीं होने पर आखिरकार परिजनों ने बांस की बल्ली और कपड़े के सहारे शव को उठाया और जंगल के रास्ते अपने गांव तक ले जाने को मजबूर हुए। मामला मैनपुर थाना क्षेत्र के बरदुला जंगल का है।

जानकारी के अनुसार बेहराडीह निवासी सुमेर सिंह कमार जनजाति से थे और पिछले करीब पांच दिनों से घर से लापता थे। परिजन उनकी तलाश कर रहे थे। इसी दौरान बरदुला के जंगल में एक पेड़ पर उनका शव लटका हुआ मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।


घंटों इंतजार के बाद टूटी उम्मीद

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों को उम्मीद थी कि शव को गांव तक पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था हो जाएगी। लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। परिजनों के अनुसार करीब तीन घंटे तक इंतजार करने के बावजूद जब वाहन नहीं मिला तो उन्हें स्वयं व्यवस्था करनी पड़ी।

बांस की बल्ली से बनाया शव वाहन

वाहन नहीं मिलने के बाद परिजनों ने बांस की बल्ली के सहारे कपड़े की मदद से शव को बांधा। इसके बाद दो लोग बल्ली को कंधे पर रखकर शव को जंगल के रास्ते ले गए। इस दौरान परिजनों और ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना की तस्वीरें सामने आने के बाद दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं शव परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पांच दिन से लापता थे सुमेर सिंह

बताया गया कि सुमेर सिंह करीब पांच दिनों से लापता थे। परिजन लगातार उनकी तलाश कर रहे थे। बरदुला के जंगल में शव मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए शव को गांव लाना था, लेकिन शव वाहन नहीं मिलने से परिजनों की परेशानी और बढ़ गई।

स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना ने दूरस्थ अंचलों में शव परिवहन की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि पोस्टमार्टम के बाद शव को गांव तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदारी किस विभाग की है और इसके लिए क्या व्यवस्था निर्धारित है। यदि किसी ग्रामीण परिवार के पास निजी वाहन की सुविधा नहीं है तो ऐसी स्थिति में सरकारी स्तर पर शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था कैसे होती है?