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उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने वाले 17 गांव हटाने की तैयारी तेज, प्रति परिवार तय हुई मुआवजे की दर

गरियाबंद जिले के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने वाले सत्रह गांवों के स्वैच्छिक विस्थापन को लेकर प्रशासन ने गति तेज कर दी है। कलेक्टर रणबीर...और पढ़ें

By Himanshu SanganiEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 06:41:48 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 06:44:00 PM (IST)
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने वाले 17 गांव हटाने की तैयारी तेज, प्रति परिवार तय हुई मुआवजे की दर
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के अंदर स्थित गांवों के स्वैच्छिक पुनर्वास को लेकर आयोजित बैठक। - प्रशासन

HighLights

  1. गरियाबंद के टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 17 गांवों के विस्थापन की तैयारी
  2. देवझर अमली और जुगाड़ के ग्रामीणों ने दी विस्थापन के लिए सहमति
  3. पुनर्वास स्थल पर मकान, सड़क, बिजली और पानी की मिलेगी सुविधा

नईदुनिया प्रतिनिध, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 17 गांवों के स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति की बैठक में टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में विस्थापन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय आदिवासियों के बेहतर पुनर्वास के बीच संतुलन स्थापित करना है।

बैठक के दौरान देवझर, अमली और जुगाड़ गांव के ग्रामीणों ने स्वेच्छा से विस्थापन के पक्ष में अपनी सहमति जताई है। प्रशासन की योजना के तहत आगामी 45 दिनों के भीतर इच्छुक परिवारों की पहचान और उनके दस्तावेजों का सत्यापन पूरा किया जाएगा। इस दौरान ग्रामीणों को अपने दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने का भी अवसर मिलेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी योजना पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी भी परिवार पर जबरदस्ती दबाव नहीं डाला जाएगा।


पुनर्वास स्थल पर आधुनिक सुविधाएं

प्रशासन ने विस्थापित होने वाले परिवारों के उज्ज्वल भविष्य और आजीविका सुरक्षा के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। नए पुनर्वास स्थल पर पक्के मकान, कृषि भूमि, तालाब, सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को न्यूनतम करने वाले क्षेत्रों का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

आकर्षक आर्थिक विकल्प दिए जाएंगे

विस्थापित परिवारों को वित्तीय सहायता के रूप में प्रति यूनिट 15,00,000 रुपये या पांच एकड़ भूमि में से किसी एक विकल्प का चयन करने का प्रावधान रखा गया है। यूनिट की गणना पति-पत्नी और पात्र वयस्क बच्चों के आधार पर तय की जाएगी। गरियाबंद प्रशासन का यह कदम न केवल वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि विस्थापित आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़कर स्थायी आजीविका के अवसर भी प्रदान करेगा।

पुनर्वास स्थल पर घर, खेत और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था

स्वैच्छिक विस्थापन की चर्चा में केवल गांवों को नए स्थान पर बसाने के बजाय ग्रामीण परिवारों के भविष्य और आजीविका की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया। बैठक के एजेंडे में पुनर्वास स्थल पर सड़क, बिजली, स्कूल, पेयजल, आंगनबाड़ी, सामुदायिक केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने से जुड़े विषय शामिल रहे।

बारनवापारा का उदाहरण सामने रखा

प्रस्तावित पुनर्वास की तस्वीर को समझने के लिए बारनवापारा क्षेत्र में पहले किए गए विस्थापन का उदाहरण भी चर्चा में रखा गया। वहां व्यवस्थित घरों, खेतों, तालाबों और अन्य सुविधाओं से जुड़े विकास को ग्रामीणों के सामने उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।

देवझर अमली के 156 परिवारों में 120 जाने के इच्छुक

बैठक में शामिल देवझर अमली के ग्रामीण पुष्तम मांझी ने बताया कि गांव में कुल 156 परिवार हैं। उनके अनुसार, लगभग 120 परिवार विस्थापन के लिए तैयार हैं, जबकि करीब 30 से 35 परिवार गांव में रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से आवेदन देने के लिए 45 दिनों का समय दिया गया है।