
नईदुनिया प्रतिनिधि, मैनपुर। विकासखंड मैनपुर के सुदूर वनांचल और पहाड़ी-जंगलों से घिरे ग्राम अमाड़ के बाशिंदों के लिए बुनियादी जरूरतों को पूरा करना किसी रोजमर्रा के संघर्ष से कम नहीं है। केंद्र सरकार की 'हर घर जल, हर घर नल' योजना यहां केवल कागजों और वादों तक ही सीमित होकर रह गई है। हालात यह हैं कि सरकारी तंत्र और ठेकेदारों की लापरवाही का खामियाजा आम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
करीब तीन साल पहले क्रेडा एवं पीएचई विभाग के माध्यम से गांव में बड़े अरमानों के साथ सौर ऊर्जा आधारित पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। योजना के तहत 40 से 45 घरों तक पाइपलाइन बिछाने का दावा किया गया था, लेकिन आज तक एक भी घर के नल से पानी की एक बूंद तक बाहर नहीं आ पाई है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यह टंकी आज ग्रामीणों के लिए केवल एक बेजान शोपीस बनकर रह गई है।
पहाड़ और जंगल से घिरे इस दूरस्थ अंचल में हर साल मौसमी बीमारियों का बड़ा खतरा बना रहता है। शुद्ध पेयजल की उपलब्धता जीवन बचाने के लिए सबसे पहली शर्त है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण यहां के लोग बेबस हैं। टंकी की सफाई लंबे समय से नहीं होने के कारण उसके अंदर गंदगी और कीचड़ जमा हो चुका है। टंकी के पास लगे एकमात्र कनेक्शन से भी केवल गंदा पानी ही बाहर निकल रहा है, जबकि घरों तक जाने वाली पाइपलाइनें पूरी तरह अधूरी पड़ी हैं।
ग्राम पंचायत अमाड़ के सरपंच प्रतिनिधि गोपाल सिंह नेताम ने बताया कि 'सुशासन तिहार' के दौरान जिले के कलेक्टर ने खुद मौके पर आकर 15 दिनों के भीतर हर घर तक पानी पहुंचाने का पक्का आश्वासन दिया था। हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार ने बीच में ही काम अधूरा छोड़ दिया और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं।
अब सरपंच सुभद्रा बाई नेताम, सरपंच प्रतिनिधि गोपाल सिंह नेताम और समस्त ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन तथा पीएचई विभाग के उच्च अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच हो। साथ ही, अधूरी पड़ी पाइपलाइन के काम को तुरंत पूरा कर लापरवाह जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि इन बेसहारा ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नसीब हो सके।