
शुभम भटनागर, देवभोग, गरियाबंद । राज्य की रमन सरकार विकास के दावों के ताल ठोक रही है। सरकार का दावा है कि आज हर गली-मुहल्ले में पक्की सड़क बन गई है, वहीं सरकार के विकास के दावों की पोल जामगुरियापारा के स्कूली बच्चे खोलते नजर आ रहे हैं।
यहां स्थिति यह है कि जामगुरिया पारा के प्राथमिक शाला में पढ़ने वाले 30 स्कूली बच्चे हर रोज आधा किलोमीटर कीचड़ युक्त पगडंडी सड़क को पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि बच्चों का पैर पूरी तरह से कीचड़ में धंस जाता है।
इसके बाद भी शिक्षा पाने के लिए मजबूरीवश बच्चे ऐसे कीचड़युक्त और दलदली मार्ग से गुजरकर स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करने को मजबूर हो गए हैं। मामले में स्कूली बच्चों का भी कहना है कि उन्हें हर रोज इस तरह की परिस्थितियों से जूझकर ही स्कूल जाना पड़ता है।
बच्चों की माने तो स्कूल तक पहुंचने के लिए गांव में एक मात्र सड़क है, वो भी कीचड़ से पट गया है। इसी के चलते ही सभी बच्चे इसी रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
शिक्षक नाला पार कर पहुंचते हैं स्कूल
प्राथमिक शाला जामगुरियापारा के प्रधानपाठक भंवर सिंग शांडिल्य बताते हैं कि स्कूल खुले लगभग 18 साल हो चुके हैं। यहां आज तक स्कूल के लिए सड़क की व्यवस्था नहीं की गई है। शांडिल्य के मुताबिक वे पिछले चार साल से स्कूल में पदस्थ हैं। ऐसे में वे भी हमेशा उच्चाधिकारियों को स्कूल के सड़कविहीन होने की जानकारी देते आए हैं, लेकिन आज तक जिम्मेदारों ने इस मामले में किसी तरह का कोई कदम उठाना मुनासिब नहीं समझा है।
प्रधानपाठक के मुताबिक स्कूल में उनके अलावा एक और शिक्षक पदस्थ हैं। ऐसे में दोनों शिक्षकों नाला के सामने दुपहिया रखकर नाला पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। वहीं मामले में गांव के पारेश्वर बिसी के साथ ही अन्य ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के चार महीने बच्चे हमेशा कीचड़ से सनी सड़क से चलकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हो जाते हैं।
विस चुनाव का ग्रामीण करेंगे बहिष्कार
गांव के टेकलाल बिसी, तुलाराम नागेश का कहना है कि पिछले दस सालों से लगातार सुराज के साथ ही अधिकारी वर्ग को आवेदन कर वस्तुस्थिति से अवगत करवाते आ रहे है। इसके बाद भी आज तक उनकी मांगों पर किसी ने विचार करना उचित नहीं समझा है।
ऐसे में इस बार सभी गांव के लोग शासन-प्रशासन के जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली से नाराज हो गए है। ग्रामीणों की माने तो जिस शासन के पास उनकी समस्याओं को सुनने का समय नहीं है, तो ऐसी सरकार चुनने या नहीं चुनने का क्या मतलब रह गया है।
वहीं इस बार गांव के सभी ग्रामीणों ने बैठक कर निर्णय लिया है कि आने वाले विस चुनाव के सभी ग्रामीण मिलकर बहिष्कार करेंगे। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि जो भी नेता वोट मांगने आएगा, उसे गांव की सड़कों को दिखाकर विकास के विषय में पूछा जाएगा।
'सरकार के विकास के दावे छलावे हैं। सरकार कहती कुछ है और करती कुछ है। आज जामगुरियापारा स्कूल के बच्चे कीचड़युक्त सड़क से होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। ऐसे में सरकार को जामगुरियापारा आकर अपने विकास की सच्चाई स्कूली बच्चों से पूछनी चाहिए।" - सुखचंद बेसरा, अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी देवभोग
- आपके माध्यम से मामले की जानकारी मिली है। मैं संबंधित अधिकारी से जानकारी लेकर जल्द ही वहां सड़क बनवाता हूं, वहीं स्कूली बच्चों के साथ ही ग्रामीणों की समस्या को जल्द ही दूर किया जाएगा। - श्याम धावड़े, कलेक्टर, गरियाबंद