
नईदुनिया, प्रतिनिधि, जगदलपुर। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण आदिवासी आबादी बहुल बस्तर के साथ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों का विशेष लगाव रहा है। आजादी के बाद बीते 79 वर्षों में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तक पांच राष्ट्रपति बस्तर आ चुके हैं। द्रौपदी मुर्मु इसी साल सात फरवरी को बस्तर पंडुम में शामिल होने आई थीं। अब 23 अक्टूबर को बस्तर दशहरा के प्रसिद्ध मुरिया दरबार में शामिल होने वह अपने दूसरे प्रवास पर बस्तर आ रही हैं।

इन सभी राष्ट्रपतियों ने बस्तर आकर कोई न कोई बड़ा संदेश दिया है। बता दें कि प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलाकर अब तक सात प्रधानमंत्री भी बस्तर का दौरा कर चुके हैं।
देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद 23 मार्च 1953 को बस्तर आए थे। उनके साथ मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल भी थे। जगदलपुर से 18 किलोमीटर दूर ग्रामीणों के आमंत्रण पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद एक गांव में गए थे। वहां उन्होंने श्रमदान से निर्मित छात्रावास का उद्घाटन किया था।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने गांव में श्रमदान से कुआं निर्माण के लिए भूमिपूजन भी किया था। आज भी वह कुआं विद्यमान है। उन्होंने देश के पुनर्निर्माण के लिए जनता से सामुदायिक भागीदारी और श्रमदान में आगे बढ़कर शामिल होने का आह्वान किया था।
मिसाइल मैन के नाम से चर्चित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का बस्तर से गहरा नाता रहा है। रक्षा वैज्ञानिक के रूप में वे अनेकों बार बस्तर दौरे पर आए थे। बस्तर के गिरोला और मारडूम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के केंद्र की स्थापना उनकी पहल पर ही हुई थी।
राष्ट्रपति बनने के बाद चार जून 2004 को डॉ. कलाम ने तोकापाल ब्लॉक के ग्राम रानसरगीपाल का दौरा किया था। यहां जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा की अलख जगाई थी। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए लक्ष्य तय कर आगे बढ़ने का संदेश देते हुए कलाम ने शिक्षा ही देश के भविष्य का आधार बताया था। हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का आह्वान किया था।
प्रतिभा पाटिल बस्तर आने वाली तीसरी राष्ट्रपति थीं। परिवार के साथ 29 सितंबर 2008 को बस्तर आई प्रतिभा पाटिल विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात देखने गई थीं। जलप्रपात के सौंदर्य से अभिभूत प्रतिभा पाटिल ने बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुविधाओं के विस्तार की जरूरत बताई थी।
उनका कहना था कि बस्तर देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होने का दर्जा रखता है। उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति की भी जमकर प्रशंसा की थी और प्राकृतिक संपदा को बचाए रखने का आह्वान करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने की बात कही थी।
बस्तर आने वाले चौथे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद थे। 25-26 जुलाई 2018 को दो दिवसीय बस्तर प्रवास के दौरान उन्होंने दंतेवाड़ा जाकर माई दंतेश्वरी का दर्शन किया था। चित्रकोट जलप्रपात भी देखने गए थे। रामनाथ कोविंद ने 26 जुलाई को स्वर्गीय बलीराम कश्यप स्मृति मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में संचालित शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय का लोकार्पण कर सभा को भी संबोधित किया था।
उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देते हुए बस्तर के युवाओं से डॉक्टर, इंजीनियर, प्राध्यापक बनने का आह्वान किया था। द्रौपदी मुर्मु ने भी जनजातीय समाज से शिक्षा को हथियार बनाने का आह्वान किया है। उम्मीद की जा रही है कि मुरिया दरबार में भी वह कोई बड़ा संदेश देंगी।