
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। बस्तर जिले में ग्रामीण विकास से जुड़ी केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'वीबी-जी राम जी' योजना के क्रियान्वयन में सुस्ती और अनुशासनहीनता बरतने वाले कर्मचारियों पर गाज गिरी है। जिला पंचायत के नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) तन्मय खन्ना ने मैदानी समीक्षा के बाद कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाते हुए दो तकनीकी सहायकों से अनिवार्य त्यागपत्र ले लिया है, जबकि एक को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा एक अन्य तकनीकी सहायक की संविदा सेवा वृद्धि पर रोक लगा दी गई है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, जिले में इस योजना के अंतर्गत कुल 1,807 कार्य स्वीकृत हैं, जिनके लिए 5,561.34 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की जा चुकी है। विभागीय समीक्षा बैठक में यह पाया गया कि पर्याप्त धनराशि और प्रशासकीय स्वीकृति उपलब्ध होने के बावजूद धरातल पर निर्माण और विकास कार्यों की गति बेहद असंतोषजनक थी। नियमित समीक्षा और औचक मैदानी निरीक्षण के दौरान पाया गया कि संबंधित तकनीकी सहायक फील्ड पर जाने से बच रहे थे और अपने दायित्वों के प्रति लापरवाह बने हुए थे।
सीईओ तन्मय खन्ना ने स्पष्ट किया कि वीबी-जी राम जी शासन की उच्च प्राथमिकता वाली फ्लैगशिप योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे का विस्तार और रोजगार के अवसरों का सृजन करना है। इसमें किसी भी स्तर पर लेटलतीफी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। कार्यों की गति को पटरी पर लाने के लिए अब जिला पंचायत स्तर पर हर सप्ताह नियमित प्रगति समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है।
जिला पंचायत सीईओ ने सभी मैदानी अधिकारियों और इंजीनियरों को निर्देशित किया है कि वे लंबित सभी स्वीकृत कार्यों को अविलंब प्रारंभ कर तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करें। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक स्थानीय श्रमिकों का नियोजन कर मानव दिवस सृजन में तेजी लाने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि भविष्य में भी लापरवाही बरतने वालों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।