बचेली से शिकागो तक चमकी बस्तर की बेटी, 19 देशों में पहुंचाई छत्तीसगढ़ की संस्कृति; मिलेगा राज्य सम्मान
अमेरिका में छत्तीसगढ़ की संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली दंतेवाड़ा की दीपाली सरावगी को 'छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान' मिलेगा। दीपाली 'नाचा' की संस्थापक हैं और मातृभूमि से गहराई से जुड़ी हैं।
Publish Date: Mon, 02 Nov 2026 02:23:15 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Nov 2026 02:23:15 PM (IST)
बस्तर की बेटी बचेली से शिकागो तक चमकी। (नईदुनिया)HighLights
- बचेली की दीपाली को मिलेगा 'छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान'।
- शिकागो में रहकर छत्तीसगढ़ी संस्कृति को दे रहीं वैश्विक पहचान।
- प्रवासी भारतीय एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (नाचा) की हैं संस्थापक।
विनोद सिंह, नईदुनिया, जगदलपुर: दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा की लौह नगरी बचेली में जन्मी पली बढ़ी और अब सात समंदर पार अमरीका में छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति का मान बढ़ा रही दीपाली सरावगी (40) को ‘छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान’ मिलेगा। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार ने बस्तर की इस बेटी को वैश्विक मंच पर सम्मानित करने का निर्णय लिया है। अमेरिका के शिकागो में निवासरत दीपाली सरावगी छत्तीसगढ़ की संस्कृति, विरासत और सामाजिक सहभागिता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने तथा विश्वभर में बसे अप्रवासी छत्तीसगढ़ियों को अपनी मातृभूमि से जोड़ने का काम कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति जगाया आभार
- दीपाली उत्तर अमेरीका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन, प्रवासी भारतीय एसोसिएशन आफ छत्तीसगढ़ (नाचा) की संस्थापक हैं और वर्तमान में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में नाचा आज अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर, जर्मनी, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया और नार्डिक सहित विश्व के 19 देशों में फैला एक सशक्त वैश्विक संगठन बन चुका है।
वह दि ट्राइबल्स फाउंडेशन की संस्थापक-अध्यक्ष भी हैं। पिछले चार वर्षों से अमेरीका में भारतीय स्वदेशी मेला के सफल आयोजन में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। यह मेला आज अमरीका के प्रमुख भारतीय सांस्कृतिक उत्सवों में से एक है, जिसमें 30 हजार से अधिक लोग शामिल होते हैं। इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि भारत के 50 से अधिक पारंपरिक हस्तशिल्प कलाकारों को अमरीका में अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच मिलता है।
दीपाली सरावगी ने सम्मान के लिए चयनित होने पर इंटरनेट मीडिया के माध्यम रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर संगठन नाचा की ओर से छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया है। संगठन ने कहा कि बचेली से शिकागो तक की यह यात्रा हर छत्तीसगढ़िया के लिए प्रेरणा है और यह सम्मान दुनिया भर के अप्रवासी छत्तीसगढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करेगा। संस्कृति से गहरा लगाव
- दीपाली सरावगी को ‘छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान’ की घोषणा पर नईदुनिया ने बचेली में उनके स्वजन कृष्णा कर से फोन पर संपर्क किया। दीपिका, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम लिमिटेड (एनएमडीसी) में कार्यरत कृष्णा कर के छोटे भाई गणेश कर की धर्मपत्नी हैं।
- कृष्णा कर ने बताया कि दीपाली के पिता पीके सरावगी एनएमडीसी की बचेली परियोजना में कार्यरत रहकर सेवानिवृत्त हुए हैं। दीपाली का जन्म बचेली में हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय बचेली से हुई और उच्च शिक्षा दिल्ली में पूरी की।
- बस्तर की आदिवासी कला एवं संस्कृति और छत्तीसगढ़ संस्कृति को गहराई से समझने और जीने वाली दीपाली पति गणेश कर के साथ 2009 में अमरीका चली गईं। गणेश कर वहां शिकागो में मैकेनिकल इंजीनियर हैं। अमरीका में भी दीपाली बस्तर और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने निरंतर काम कर रही हैं लेकिन दोनों पति-पत्नी बस्तर और छत्तीसगढ़ से अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं।