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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 17, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

CG News : पोलावरम परियोजना के प्रभावितों को नए ठिकाने की तलाश, नगर पंचायत कोंटा सहित नौ बसाहट क्षेत्र होंगे प्रभावित

बांध का निर्माण पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में बिजली घर का निर्माण चल रहा है। अगले साल परियोजना पूर्ण हो जाएगी।

By Pramod SahuEdited By: Pramod Sahu
Publish Date: Sun, 17 Jul 2022 08:27:07 PM (IST)Updated Date: Sun, 17 Jul 2022 08:27:55 PM (IST)
CG News : पोलावरम परियोजना के प्रभावितों को नए ठिकाने की तलाश, नगर पंचायत कोंटा सहित नौ बसाहट क्षेत्र होंगे प्रभावित

विनोद सिंह, जगदलपुर (नईदुनिया)। छत्तीसगढ़ की सीमा से 130 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर निर्माणाधीन पोलावरम बहुउद्देशीय राष्ट्रीय परियोजना के यहां छत्तीसगढ़ के कोंटा नगर पंचायत एवं आसपास के डूबान प्रभावित बसाहटों के विस्थापितों को नए ठिकाने की तलाश है।

इस परियोजना से सबरी नदी के तट पर बसे कोंटा नगर पंचायत सहित नौ बसाहट क्षेत्र प्रभावित होंगे। इनमें कोंटा, वेंकटपुरम व ढ़ोढ़रा के लगभग साढ़े पांच हजार मकान और करीब डेढ़ हजार की आबादी विस्थापित होगी। परियोजना प्रभावित अन्य बसाहट क्षेत्र फंदीगुड़ा, इंजरम, आसीरगुड़ा, पेदाकिसोली, मेटागुड़ा और बंजामगुड़ा में आबादी प्रभावित नहीं होगी लेकिन कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा डूबेगा। बांध का निर्माण पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में बिजली घर का निर्माण चल रहा है। अगले साल परियोजना पूर्ण हो जाएगी।


बांध में पूर्ण जलभराव (समुद्र सतह से 45.72 मीटर तक) और इससे इस क्षेत्र में बहने वाली गोदावरी नदी की प्रमुख सहायक नदी में बैकवाटर से छत्तीसगढ़ के अलावा सीमावर्ती ओडिशा व तेलंगाना में भी इस परियोजना का व्यापक असर होगा। गोदावरी के उफान पर आने से सबरी नदी में बैकवाटर से कोंटा नगर का आधा से अधिक क्षेत्र डूब गया है। जिससे पता चलता है कि पोलावरम से कोंटा में तबाही का क्या दृश्य होगा।

इधर अभी तक परियोजना को लेकर छत्तीसगढ़ में जन सुनवाई नहीं हुई है। मुआवजा तय हो चुका है परंतु न किसी ने मुआवजा लिया है न उनके व्यवस्थापन की कोई पहल की गई है। आंध्रप्रदेश द्वारा जनसुनवाई के लिए डूबान संबंधी सर्वेक्षण रिपोर्ट छत्तीसगढ़ को बार-बार मांगेे जाने के बाद भी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।

छत्तीसगढ़ व ओडिशा सुप्रीम कोर्ट के निणर्य का इंतजार कर रहे हैं। बांध की उंचाई कम करने की मांग की जा रही है किंतु ऐसा न हुआ तो एक बड़ी आबादी को इन राज्य सरकारों की लेटलतीफी के कारण कष्ट भुगतना होगा। छत्तीसगढ़ के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मामले को संज्ञान में लेकर दिशा निर्देश दिए हैं पर उस पर भी अभी तक आंध्र ने गंभीरता नहीं दिखाई है।

सबरी में बैकवाटर 163 फीट के स्तर पर

शनिवार रात को कोंटा में सबरी नदी का जलस्तर खतरे के निशान (16 मीटर) से उपर 19.970 मीटर तक पहुंच गया था। पोलावरम को लेकर सात अगस्त 1978 को हुए अंतर्राज्यीय समझौते में बांध में जलभराव का अधिकतम स्तर 45.72 मीटर (फुल टैंक लेवल) और बैकवाटर का कोंटा क्षेत्र में अधिकतम प्रभाव 150 फीट तक रखने की बात कही गई है।

पिछले सौ सालों के वर्षा और गोदावरी नदी में बाढ़ के आंकड़ों के अनुसार बाढ़ की अधिकतम गणना 177 फीट की गई है। हालांकि आंध्रप्रदेश ने समझौते के अनुरूप गबांध के बैकवाटर का प्रभाव कोंटा क्षेत्र में 150 फीट से उपर नहीं जाने देने का भरोसा दिया है लेकिन छत्तीसगढ़ ने आंध्रप्रदेश के दावे पर भरोसा न करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।

छत्तीसगढ़ में डूबान की यह होगी स्थिति

सबरी नदी के बैकवाटर 150 फीट के स्तर पर कोंटा को मिलाकर नौ गांवों की निजी, सरकारी और वन भूमि को मिलाकर करीब 1390 एकड़ जमीन डूबेगी। 525 किसान प्रभावित होंगे। इसके साथ ही करीब डेढ़ हजार की आबादी को विस्थापित करना होगा। जिनमें 90 फीसद आदिवासी होंगे। इनमें दोरला जनजाति मुख्य है। छत्तीसगढ़ शासन ने करीब 390 करोड़ रुपये की पुनर्वास एवं विस्थापन (आरआर पालिसी) की योजना तैयार की है।

आंध्रप्रदेश को इसका प्रस्ताव साल भर पहले भेजा जा चुका है पर अभी तक कोई जवाब वहां से नहीं आया है। परियोजना में आंधप्रदेश और तेलंगाना में पुनर्वास एवं विस्थापन संबंधी 30 फीसद काम पूरा हो गया है। छत्तीसगढ़ में अभी इस दिशा में काम शून्य है।

आंध्र से सर्वेक्षण रिपोर्ट का इंजतार

आंध्रप्रदेश से कोंटा क्षेत्र में डूबान संबंधी विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट व कुछ अन्य जरूरी दस्तावेज जनसुनवाई के लिए मांगे गए हैं। जो अभी तक नहीं प्राप्त हुए हैं। पुनर्वास एवं विस्थापन की योजना तैयार कर रिपोर्ट छत्तीसगढ़ शासन को भेजी जा चुकी है।

-करण सिंह भंडारी, अधीक्षण यंत्री इंंद्रावती परियोजना मंडल जगदलपुर