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कच्चे घरों के बीच पक्के चर्चः ईडी की जांच में सामने आया अमेरिकी मिशनरी से जुड़े फंड का बस्तर कनेक्शन

बस्तर के आदिवासी गांवों में एक धीमा लेकिन गहरा बदलाव आकार ले रहा है। जहां पहले देवगुड़ी आस्था का केंद्र हुआ करती थी, वहीं अब पक्के और सुसज्जित चर्च नई...और पढ़ें

By Animesh PaulEdited By: manoj dubey
Publish Date: Mon, 27 Apr 2026 12:07:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Apr 2026 12:12:18 PM (IST)
कच्चे घरों के बीच पक्के चर्चः ईडी की जांच में सामने आया अमेरिकी मिशनरी से जुड़े फंड का बस्तर कनेक्शन
बस्तर में विदेशी फंडिंग से आस्था पर चोट: कच्चे घरों के बीच पक्के चर्च। फोटो नईदुनिया

HighLights

  1. टीटीआई से जुड़े फंड का बस्तर तक सीधा लिंक
  2. छह माह में 6.5 करोड़ बस्तर और धमतरी में खर्च
  3. जमीन पर दिखता असर: गांवों का बदलता केंद्र

अनिमेष पाल, नईदुनिया, जगदलपुर। बस्तर के आदिवासी गांवों में एक धीमा लेकिन गहरा बदलाव आकार ले रहा है। जहां पहले देवगुड़ी आस्था का केंद्र हुआ करती थी, वहीं अब पक्के और सुसज्जित चर्च नई पहचान बनते दिख रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच ने इस बदलाव को आर्थिक परिप्रेक्ष्य भी दे दिया है।

अमेरिकी मिशनरी नेटवर्क से जुड़े करोड़ों रुपये के फंड का बस्तर तक सीधा पहुंचना अब दस्तावेजों में दर्ज हो चुका है। बस्तर के भीतरू इलाकों में बदलाव की कहानी अब केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक और संरचनात्मक भी हो गई है।


टीटीआई से जुड़े फंड का बस्तर तक सीधा लिंक

कच्चे घरों वाले गांवों के बीच खड़े पक्के चर्च इस परिवर्तन के सबसे स्पष्ट संकेत बनकर उभरे हैं। ईडी की हालिया जांच में सामने आया है कि अमेरिकी मिशनरी नेटवर्क द टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआई) से जुड़े फंड का बस्तर तक सीधा लिंक है। बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 24 डेबिट कार्ड और नकदी के साथ पकड़े गए नेटवर्क की कड़ियां बस्तर से जुड़ती बताई जा रही हैं।

छह माह में 6.5 करोड़ बस्तर और धमतरी में खर्च

जांच एजेंसियों के अनुसार टीटीआई भारत में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत नहीं है, इसके बावजूद चर्च निर्माण और विस्तार से जुड़े खर्च सामने आए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले छह महीनों में करीब 6.5 करोड़ रुपये बस्तर और धमतरी के माओवादी प्रभाव वाले इलाकों में खर्च किए गए। वहीं नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच देशभर में इसी तरह के नेटवर्क से 95 करोड़ रुपये निकाले जाने की जानकारी मिली है।

जमीन पर दिखता असर: गांवों का बदलता केंद्र

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10–15 वर्षों में बस्तर में 3000 से अधिक चर्च बने हैं। गांव-गांव में उभरती नई इमारतें इस बात का संकेत हैं कि बाहरी स्रोतों से आया पैसा किस तरह जमीन पर आकार ले रहा है। करंजी गांव इसकी एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।

गांव के बीच पुरानी देवगुड़ी अब भी मौजूद है, लेकिन उसकी सामाजिक भूमिका सीमित हो चुकी है। इसके विपरीत, सड़क किनारे बना पक्का चर्च गांव की गतिविधियों का नया केंद्र बन गया है। चर्च के पादरी फूलसिंह बघेल बताते हैं कि 2003 में यहां चर्च का निर्माण इंडियन इवेंजेलिकल टीम (आइईटी) के सहयोग से हुआ था।

इसके बाद धीरे-धीरे कई परिवार इससे जुड़े और अब अलग-अलग मोहल्लों में भी चर्च बन गए हैं। गांव के बुजुर्ग सोनसाय बेंजाम, जिन्होंने मतांतरण नहीं किया, कहते हैं कि पहले गांव की पहचान देवगुड़ी से थी, अब सब कुछ बदल रहा है। अब कुछ वर्षों में यहां का जनजातीय समुदाय अपनी संस्कृति को बचाने जागरुक हुआ है, जिससे अब गांवों में टकराव बढ़ा है और गांव दो पाटों में बंट गए हैं।

एक के बाद एक चर्च, बदलती सामाजिक संरचना

करंजी से आगे मोरठपाल में सड़क किनारे बना चर्च भी इसी बदलाव की गवाही देता है। यह चर्च 2017 में मेथोडिस्ट चर्च के सहयोग से बना था। यहां के पादरी मनोज बघेल बताते हैं कि अब आसपास के कई परिवार इससे जुड़ चुके हैं।

इसके आगे बाघनपाल गांव में 2016 में बना चर्च अब 150 से अधिक परिवारों के आस्था का केंद्र बन चुका है। माड़िया जनजाति के राजूलाल बघेल बताते हैं कि शुरुआत में कुछ ही लोग जुड़े थे, लेकिन धीरे-धीरे गांव के कई परिवारों ने अपने पारंपरिक देवी-देवताओं से दूरी बना ली। वे कहते हैं कि चर्च जाने वाले लोग अब देवगुड़ी नहीं जाते।

जांच के बाद उठे सवाल

ईडी की जांच के बाद कई सवाल सामने हैं। क्या गांवों में तेजी से बने चर्चों के पीछे यही विदेशी फंडिंग है? क्या इन फंड का उपयोग कानूनी दायरे में हुआ या उससे बाहर जाकर? जांच एजेंसियां फिलहाल इस नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग और मतांतरण का खेल, गृह मंत्री ने दिए बड़ी कार्रवाई के संकेत, जांच के दायरे में 153 संस्थाएं

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

विदेशी मिशनरियों के इशारे पर बस्तर की आदिवासी संस्कृति को खत्म करने की साजिश हो रही है। ग्राम सभा की अनुमति के बिना बने अवैध निर्माणों को तोड़ा जाना चाहिए। टीटीआइ समेत अन्य मिशनरी संस्थाओं के फंडिंग की भी जांच होनी चाहिए। -राजाराम तोड़ेम, प्रांत अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज

राज्य सरकार का धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 अवैध मतांतरण पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम है। अब ईडी की जांच से स्पष्ट है कि विदेशी फंडिंग के जरिए गलत तरीके से गतिविधियां बढ़ाई जा रही थीं।

-वेदप्रकाश पांडेय, भाजपा जिलाध्यक्ष