
रामकृष्ण बैरागी, नईदुुनिया, किरंदुल। लौह अयस्क के विशाल भंडार के लिए दुनिया भर में पहचानी जाने वाली बैलाडीला की खूबसूरत वादियां अब अपनी नैसर्गिक छटा से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। किरंदुल-बचेली क्षेत्र में करीब साढ़े तीन दशक तक पसरे माओवादी हिंसा के बादल छंटने के बाद अब पर्यटन की नई सुबह देखने को मिल रही है। कभी गोलियों की गूंज और माओवादियों के खौफ के कारण वीरान रहने वाला 'मलांगीर जलप्रपात' अब सैलानियों का पसंदीदा हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है।
किरंदुल शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर हिरोली ग्राम पंचायत के वनांचल में स्थित मलांगीर जलप्रपात अपनी मनोहारी छटा के लिए जाना जाता है। हरी-भरी पर्वतमालाओं और कल-कल बहते नदी-नालों के बीच गिरती जलधारा पर्यटकों का मन मोह लेती है। इलाके में सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव और स्थायी शांति स्थापित होने के बाद अब न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पड़ोसी राज्य तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से भी बड़ी संख्या में सैलानी यहां पिकनिक मनाने और सुकून के पल बिताने पहुंच रहे हैं।
पर्यटन की असीम संभावनाएं होने के बावजूद मलांगीर तक पहुंचने की डगर बेहद कठिन और पथरीली है। वर्तमान में पर्यटकों को उबड़-खाबड़ और जर्जर कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के दिनों में यह रास्ता और अधिक दुर्गम हो जाता है। मौके पर सुरक्षा रैलिंग, स्वच्छ पेयजल, प्रसाधन और बैठने की समुचित व्यवस्था न होने से सैलानियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस जलप्रपात को मुख्यधारा के पर्यटन मानचित्र पर लाने की आवाज उठाई है। जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी का कहना है कि प्रशासन को स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए बुनियादी विकास कार्य जल्द शुरू कराने चाहिए। वहीं जनपद अध्यक्ष सुकालू मुड़ामी ने क्षेत्र के सभी दूरस्थ प्राकृतिक स्थलों को पक्की सड़कों से जोड़कर एक सुव्यवस्थित पर्यटन सर्किट बनाने की मांग की है, ताकि बस्तर का प्राकृतिक सौंदर्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सके।