
जगदलपुर (ब्यूरो)। पड़ोसी राज्य सीमांध्र में निर्माणाधीन पोलावरम अन्तर्राज्यीय बहुउद्देशीय परियोजना से सुुकमा जिले को होने वाले नुकसान का आंकलन करने राज्य सरकार खुद विस्तृत सर्वे कराएगी। सर्वे के लिए प्राकल्लन तैयार करने जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। अकेले सर्वे करने का निर्णय ऐसे समय में आया है जब केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार बनने के बाद राज्य की भाजपा सरकार पर यू-टर्न लेने का आरोप बस्तर के आदिवासी नेता व आदिवासी संगठन लगा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सर्वे करने का निर्णय आने के बाद सीमांध्र के साथ संयुक्त सर्वे के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। विदित है कि अविभाजित आंध्रप्रदेश की सरकार ने पोलावरम से होने वाले नुकसान के संयुक्त सर्वे के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को आधा करोड़ रूपए से अधिक की राशि दे रखी है। पांच साल से दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के पास यह राशि जमा है। प्रभावित क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का हवाला देकर संयुक्त सर्वे अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के संबंधित हर विभाग के बांध के डूबान से संभावित नुकसान को लेकर अलग-अलग दावे हैं। वन विभाग हो राजस्व कोई भी विभाग दावे के साथ नुकसान को लेकर कुुछ भी नहीं कह रहा है। वन विभाग ने पहले बांध के बैकवाटर से सबरी नदी में बाढ़ आने की स्थिति में 150 कंटूर हाईट पर 7267 हेक्टेयर वन भूमि के डूबने की बात अपनी रिपोर्ट में कही थी, बाद में विभाग ने इससे मुकरते हुए नई रिपोर्ट दी है जिसमें कहा गया है कि इस कंटूर हाईट पर एक इंच वन भूमि भी नहीं डूबेगी। इसी तरह राजस्व विभाग की रिपोर्ट भी संदेहास्पद रही है। सिविल सूट में संशोधन के प्रारूप के अनुमोदन के बाद सरकार को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दिनों वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम, मनीष कुंजाम आदि ने सरकार की आलोचना की थी। आदिवासी संगठन भी आलोचना में जुटे हैं।
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छत्तीसगढ़ सरकार के पास पोलावरम से संभावित नुकसान के वास्तविक आंकड़े भले ही नहीं हैं पर सीमांध्र की सरकार के पास छत्तीसगढ़ को होने वाले नुकसान के आंकड़े हैं। सीमांध्र सरकार ने इस संबंध में रिपोर्ट भी छत्तीसगढ़ सरकार को दे रखी है हालांकि सुकमा जिला प्रशासन ने इन रिपोर्टो को गलत बताया है।
वर्सन
पोलावरम से होने वाले नुकसान का आंकलन करने विभाग खुद ही सर्वे कराएगा। मंत्री जी ने इसके लिए निर्देश दिए हैं। विभाग सर्वे की रूपरेखा बना रहा है। बजट की मांग के लिए भी प्रस्ताव बनाया जा रहा है।
एचआर कुटारे, प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग छग शासन