छत्तीसगढ़ में यूसीसी पर आदिवासी अधिकारों का सवाल, सर्व आदिवासी समाज ने केंद्र और राज्य सरकार से सात बिंदुओं पर मांगा जवाब
बस्तर में शुक्रवार को यूसीसी के प्रारूप पर चर्चा के दौरान सर्व आदिवासी समाज ने यह सवाल उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार से सात बिंदुओं पर जवाब मांगा।
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 08:38:58 PM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 08:40:06 PM (IST)
HighLights
- प्रदर्शन कर यूसीसी के विरोध में नारे लगाए
- पांचवीं अनुसूची और पेसा पर उठाए सवाल
- विभाग के नाम परिवर्तन पर भी आपत्ति
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने पर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, विशिष्ट पहचान और परंपरागत व्यवस्थाओं का क्या होगा? बस्तर में शुक्रवार को यूसीसी के प्रारूप पर चर्चा के दौरान सर्व आदिवासी समाज ने यह सवाल उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार से सात बिंदुओं पर जवाब मांगा।
जिला कलेक्टोरेट स्थित प्रेरणा हाल में आयोजित बैठक में समाज के कुछ प्रतिनिधियों को सूची में नाम नहीं होने के कारण प्रवेश नहीं मिला तो हंगामा हो गया।
प्रदर्शन कर यूसीसी के विरोध में नारे लगाए
नाराज प्रतिनिधियों ने बाहर प्रदर्शन कर यूसीसी के विरोध में नारे लगाए। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें बैठक में प्रवेश दिया गया। करीब 10 मिनट तक गहमागहमी रही। बैठक में उच्च स्तरीय प्रारूप समिति के अध्यक्ष एमके राऊत, सदस्य मोहन सिंह पवार और ज्योति रानी सिंह, समिति के सचिव श्याम धावड़े तथा संभागायुक्त डोमन सिंह उपस्थित रहे।
पांचवीं अनुसूची और पेसा पर सवाल
समिति ने विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के सुझाव और आपत्तियां सुनीं। सर्व आदिवासी समाज ने पांचवीं अनुसूची और पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी पेसा कानून, 1996 के तहत मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण को लेकर सवाल उठाए।
समाज ने पूछा कि इन प्रावधानों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में यूसीसी लागू होने पर आदिवासियों के रीति-रिवाजों, परंपरागत व्यवस्थाओं और अधिकारों की स्थिति क्या होगी। नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों के अधिकारों और संवैधानिक पहचान पर संभावित प्रभाव को लेकर भी स्पष्टता मांगी गई।
विभाग के नाम परिवर्तन पर भी आपत्ति
आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलकर जनजाति कल्याण विभाग किए जाने पर भी समाज ने आपत्ति जताई। प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी समुदाय की विशिष्ट पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। समाज ने चेतावनी दी कि इन मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर यूसीसी का विरोध जारी रहेगा।
विवाह, विरासत और लिव-इन संबंधों पर चर्चा
बैठक में विभिन्न धर्मों और समाजों के प्रतिनिधियों के साथ विवाह एवं तलाक, उत्तराधिकार एवं विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने प्रारूप को लेकर सुझाव और आपत्तियां रखीं। कुछ संगठनों ने प्रस्तावित कानून का समर्थन किया, जबकि कुछ ने अपनी सामाजिक परंपराओं और मौजूदा कानूनी संरक्षण पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
यूसीसी क्या है, छत्तीसगढ़ में क्या है तैयारी
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और भरण-पोषण जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी प्रावधान लागू करना है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसका प्रारूप तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की है।
समिति विभिन्न धर्मों, समाजों और संगठनों से चर्चा कर सुझाव और आपत्तियां जुटा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शीतकालीन विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक लाने की बात कही है। जगदलपुर की बैठक इसी परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है।