
जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
बस्तर की महत्वाकांक्षी जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना के रास्ते में लगातार आ रही बाधाओं के चलते परियोजना 2023 तक पूरी हो पाएगी, इसमें संदेह गहराता जा रहा है। रेललाइन निर्माण के लिए गठित कंपनी बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड ने 2023 तक रेललाइन पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। कंपनी की योजना अप्रैल 2018 में निर्माण कार्य शुरू करने की थी लेकिन निर्धारित समय में निर्माण शुरू नहीं हो पाया। परियोजना के लिए आधारशिला ही छह माह की देरी से 26 सितंबर 2018 को रखी गई। आधारशिला रखे हुए आठ माह पूरे हो चुके हैं। परियोजना के मार्ग में जिस तरह से आए दिन कोई न कोई अड़ंगा सामने आ रहा है, उससे तय हो गया है कि परियोजना में देरी होगी। 141 किलोमीटर लंबी जगदलपुर-रावघाट रेललाइन के लिए अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है। दो चरणों में जगदलपुर से कोंडागांव और कोंडागांव से रावघाट तक 70-70 किलोमीटर की लंबाई में बिछाई जाने वाली इस रेललाइन के लिए पहले चरण में बस्तर जिले में जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजा का वितरण किया गया है पर मुआवजा राशि को लेकर किसान संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि जमीन की कम दर पर मुआवजा राशि प्रदान की गई है। इसे लेकर 30 से अधिक किसानों ने कमिश्नर न्यायालय में दावा ठोंक रखा है। कंपनी के एक पार्टनर सेल के द्वारा भी पहले शेयर होल्डिंग कम करने दबाव डाला गया और अब कर्ज लेने के लिए बैकों को सौंपा जाने वाला कंफर्ट लेटर देने से मना कर दिया गया है। इन सब कारणों से जाहिर है कि परियोजना निर्धारित समय में पूरी नहीं हो पाएगी। उल्लेखनीय है कि दल्लीराजहरा से रावघाट तक 95 किलोमीटर की रेललाइन परियोजना का काम सेल अपने पैसे से करा रहा है। सेल की जरूरत भिलाई स्टील प्लांट के लिए रावघाट से लौह अयस्क की आपूर्ति हेतु रेललाइन बिछाना है इसलिए सेल का पूरा ध्यान अपनी रेललाइन में है। जगदलपुर-रावघाट रेललाइन से सेल को कोई फायदा नहीं है इसलिए भी सेल इस प्रोजेक्ट को लेकर बहुत गंभीर नहीं है।
पूर्व रेल राज्यमंत्री ने रखी थी आधारशिला
परियोजना का निर्माण अप्रैल 2018 में शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया था जो आज तक शुरू नहीं हो पाया है। राज्य विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 26 सितंबर 2018 को यहां जगदलपुर में लालबाग मैदान में आयोजित एक समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, स्टील राज्य मंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में रेल राज्यमंत्री राजेन्द्र गोहिल ने निर्माण कार्य शुरू करने रेललाइन परियोजना के लिए आधारशिला रखी थी। आज की स्थिति में परियोजना का काम आधारशिला तक ही सीमित है। निर्माण कब तक शुरू होगा इस बारे में अधिकारी भी कुछ नहीं कह रहे हैं।
सेल ने शेयर घटाया और कंफर्ट लेटर भी नहीं दिया
बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड के एक प्रमुख पार्टनर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड सेल ने पहले बीआरपीएल से हटने की धमकी देकर अपना शेयर 21 फीसदी से कम करके 12 फीसदी करा लिया। इसके बाद अब बैंक से कर्ज लेने जरूरी कंफर्ट लेटर देने से भी मना कर दिया है। सेल के इस कदम के कारण माना जा रहा है कि बीआरपीएल को कर्ज लेने में देरी होगी। हालांकि कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि बीआरपीएल में 52 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ एनएमडीसी सबसे बड़ा हिस्सेदार और इसके बाद 26 फीसदी शेयर के साथ इरकॉन का नंबर आता है। ये दोनों कंपनियां ही कंफर्ट लेटर दे देंगी तो कर्ज लेने में परेशानी नहीं आएगी। इरकॉन तो कंफर्ट लेटर दे भी चुका है।
किसान संतुष्ट नहीं मुआवजा राशि से
जमीन अधिग्रहण के लिए बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर जिले में कार्रवाई चल रही है। बस्तर जिले में करीब 180 करोड़ रूपये का मुआवजा बांटा जा चुका है पर किसान इससे संतुष्ट नहीं हैं। कम मुआवजा राशि मिलने की शिकायत कुछ ने दर्ज कराई है, जिस पर निर्णय आना बाकी है। यदि दावा करने वाले किसानों की शिकायत सही साबित हो गई तो बाकी किसान भी दावा करेंगे। ऐसी स्थिति में जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई में विलंब होना तय है।
फारेस्ट क्लीयरेंस मिलने में देरी की आशंका
रेललाइन के मार्ग में आने वाले वन एवं वनभूमि के फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड ने वन विभाग के पास कागजात जमा करा दिए हैं। वन विभाग दस्तावेजों की जांच कर रहा है। वन विभाग के द्वारा कई जानकारियां अलग से मांगी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि फारेस्ट क्लीयरेंस मिलने में देरी हुई तो निर्माण शुरू होने में विलंब होगा। बीआरपीएल की योजना इसी साल निर्माण कार्य शुरू करने की है पर सामने मानसून सीजन है जहां काम करना मुश्किल है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों जगदलपुर से आगे 23 किलोमीटर की लंबाई में कुछ निर्माण कार्यो के लिए टेंडर जारी किए गए थे लेकिन जो कंपनियां सामने आई थीं, उनमें कई जरूरी अर्हता पूरी करने की स्थिति में नहीं थीं। इस कारण री-टेंडर किया गया है।
प्रधानमंत्री की जनसभा में हुआ है एमओयू
दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेललाइन परियोजना 235 किलोमीटर की है। इसके लिए पहली बार दिसंबर 2007 में तत्कालीन यूपीए सरकार के समय एमओयू हुआ था। वर्तमान में रेल विकास निगम द्वारा बनाई जा रही 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट रेललाइन का निर्माण उसी एमओयू के आधार पर किया जा रहा है। दिसंबर 2007 में हुए एमओयू के अनुसार पहले चरण में 95 किलोमीटर रेलमार्ग का निर्माण पूरा होने के बाद दूसरे चरण में जगदलपुर-रावघाट रेललाइन का निर्माण शुरू करना था। इसके लिए 2012 तक का समय तय किया गया था। तय समय में काम पूरा नहीं होने और जगदलपुर-रावघाट रेललाइन में शीघ्रता से काम करने नौ मई 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दंतेवाड़ा प्रवास पर जनसभा में एनएमडीसी, सेल, इरकॉन और छग शासन ने नया एमओयू किया था। इस नए एमओयू के आधार पर 141 किलोमीटर की इस रेललाइन का निर्माण कार्य होना है। जिस गति से प्रकियाएं चल रही हैं उससे 2023 तो क्या 2025 के पहले परियोजना पूरी नहीं हो पाएगी।
जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना के लिए जरूरी कार्रवाई तेजी से जारी है। परियोजना को अप्रैल 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है। कोशिश की जाएगी की समय पर परियोजना पूरी हो सके। जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई जारी है। फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए दस्तावेज वन विभाग को सौंपा जा चुका है।
- व्हीएस प्रभाकर, सीईओ, बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड
बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड कंपनी पांच मई 2016 को रजिस्टर्ड की गई।
2016 में परियोजना के लिए डीपीआर तैयार करने का काम शुरू हुआ
जनवरी 2016 में सेल, एनएमडीसी, सीएमडीसी और इरकॉन के बीच शेयर होल्डर एग्रीमेंट किया गया।
अप्रैल 2017 जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हुई।
19 जुलाई 2017 को बीआरपीएल ने इरकॉन के साथ निर्माण कार्य के लिए एमओयू किया।
जगदलपुर-रावघाट रेललाइन की कुल लंबाई 141 किलोमीटर।
परियोजना की अनुमानित लागत 2538.30 करोड़ रूपये।