
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में दीपा सागर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। इस घटना ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब मृतका के परिजनों ने उसके मोबाइल फोन से जुड़े कई चौंकाने वाले दावे किए। परिजनों का आरोप है कि दीपा के मोबाइल से महत्वपूर्ण कॉल डिटेल, व्हाट्सएप संदेश और अन्य साक्ष्यों को सुनियोजित तरीके से डिलीट या गायब किया गया है। इस तकनीकी गड़बड़ी और छेड़छाड़ के सामने आने के बाद पुलिस जांच की दिशा और भी गंभीर हो गई है।
परिजनों के अनुसार, दीपा के मोबाइल में उन तारीखों की चैट गायब है जो मौत से ठीक पहले की थीं। विशेष रूप से 29 अक्टूबर के बाद का कोई भी चैट डेटा फोन में मौजूद नहीं है। इसके अलावा 30, 31 अक्टूबर और 1 नवंबर के सभी संदेश भी डिलीट मिले हैं।
परिजनों ने बताया कि 1 नवंबर की शाम को दीपा के भाई ने उसे फोन किया था जिस पर दोनों की लंबी बातचीत हुई थी। इसके बाद रात को दोबारा कॉल करने पर किसी अन्य व्यक्ति ने फोन उठाया था और बताया कि दीपा कहीं चली गई है। हैरानी की बात यह है कि भाई के फोन में वे कॉल्स दर्ज हैं, लेकिन दीपा के फोन से वे रिकॉर्ड गायब हैं।
इस मामले में पुलिस ने अब तक शॉर्ट पीएम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसे आत्महत्या करार दिया है। पुलिस का दावा है कि दीपा अकेली ही बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर गई थी। इसके विपरीत, मृतका की मां और अन्य परिजनों ने पुलिस के इस दावे पर ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि परिस्थितियों को देखकर यह आत्महत्या नहीं बल्कि गंभीर साजिश प्रतीत होती है। सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए परिजनों ने दीपा का मोबाइल फोन औपचारिक रूप से पुलिस को सौंप दिया है।
परिजनों की मांग के बाद अब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की जांच पर टिक गई है। मोबाइल से डिलीट हुए डेटा की रिकवरी और तकनीकी विश्लेषण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि दीपा की मौत के पीछे असल सच क्या था। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहराई से मामले की पड़ताल कर रही है।