
योगेन्द्र ठाकुर, जगदलपुर
बस्तर में वैक्सीन पोलियो का मामला सामने आया है। भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया गया है, ऐसे में यह मामला इस दावे पर सवाल उठा रहा है। हालांकि चिकित्सा विभाग के अधिकारी इसे वातावरण वाला पोलियो वायरस नहीं कह रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि जिले के तोकापाल ब्लॉक के ग्राम छापरभानपुरी के चार वर्षीय भरत पिता मोजा को अभियान के दौरान लगातार पोलियो वैक्सीन की खुराक दी जाती रही। इधर दो माह पहले बालक अचानक गिर गया और उसके हाथ-पैर सुन्न हो गए थे।
मेकॉज में भर्ती कराने के बाद डॉक्टरों ने भरत में पोलियो की आशंका जताते स्टूल (मल) व अन्य नमूने जांच के लिए कोलकाता स्थित क्षेत्रीय पोलियो लैब भेजा गया।
वहां से रिपोर्ट में वीडीपीवी (वेक्सीन डेराइव्हड पोलियो वायरस) की पुष्टि की गई जिसके आधार पर बालक का उपचार किया गया और वह अब स्वस्थ है।
एक लाख में एक प्रकरण की संभावना
विशेषज्ञों के मुताबिक बालक भरत में वातावरण में पाए जाने वाले वायरस के कारण पोलियो के लक्षण नहीं दिखे बल्कि वैक्सीन पोलियो (जिंदा वायरस)की वजह से ऐसा हुआ। जिन बच्चों को पोलियो वैक्सीन पिलाई जाती है उनमें से एक लाख में एक को ऐसा होने की आशंका बनी रहती है जिसे वीडीपीवी कहा जाता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने की स्थिति में ऐसा होता है और भरत के मामले में यही हुआ होगा, ऐसा विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना हैं। डॉ. सी. मैत्रीय के मुताबिक वर्ष 2013 में धमतरी व महासमुंद जिले में भी ऐसे प्रकरण सामने आए हैं।
दोबारा कराया टीकाकरण
इस प्रकरण के उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के पल्स पोलियो अभियान के दौरान शत-प्रतिशत बच्चों को वैक्सीन पिलाने के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं अब विभाग ने छापरभानपुरी क्षेत्र में मापअप राउंड (अतिरिक्त) पोलियो टीकाकरण अभियान चलाया है। इसमें शून्य से पांच वर्ष आयु वर्ग के भी बच्चों को पल्स पोलियो की तर्ज पर दो चक्र में दवा दी गई है। इतना ही नहीं पोलियो और ऐसे मामलों की जानकारी देते बचाव के लिए जिले के सभी खंड चिकित्साधिकारी, चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
कमजोर शरीर पर करते हैं हमला
विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो वैक्सीन की खुराक से शरीर में पोलियो के विषाणु कमजोर या नष्ट हो जाते हैं लेकिन कमजोर पैदाइश, शरीर या रोग प्रतिरोधक क्षमता कम वाले शरीर में वैक्सीन देने के बाद भी अचानक पोलियो के विषाणु सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।
यह पोलियो का वाइल्ड वायरस नहीं है। यदि किसी बच्चे को पोलियो वैक्सीन दी जाती है और बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती तब ऐसी स्थिति बनती है। बस्तर में संबंधित बालक का मामला पोलियो वायरस का नहीं है।
-डॉ. सुभाष पांडेय, राज्य टीकाकरण अधिकारी रायपुर
जिले के तोकापाल ब्लॉक के एक बालक में दो माह पहले वीडीपीवी की पुष्टि पोलियो कोलकाता रिजनल लैब से हुई थी। इसके बाद बच्चे के उपचार के साथ क्षेत्र में मापअप राउंड वैक्सीनेशन कराया गया। उपचार के बाद बालक भरत अब पूरी तरह स्वस्थ है।
-डॉ. सी. मैत्रीय, जिला टीकाकरण अधिकारी