जगदलपुर। दरभा के पत्रकार संतोष यादव को झीरम कांड का एक आरोपी निरूपित करते हुए उनकी गिरफ्तारी का बस्तर की मीडिया ने विरोध किया है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि विषम परिस्थितियों में पत्रकारिता का दायित्व निभा रहे मीडियाकर्मी पुलिस व माओवादियों दोनों का दबाव एवं प्रताड़ना झेल रहे हैं। ऐसे में संतोष यादव की गिरफ्तारी बस्तर मीडिया पर कुठाराघात है। बस्तर के पत्रकार नक्सली वारदातों, गांवों में उल्टी-दस्त से मर रहे ग्रामीणों व विभिन्न सामयिक समस्याओं की स्थल रिपोर्टिंग करने अंदरुनी क्षेत्रों में पहुंचते हैं। इनका सामना कभी पुलिस तो कभी नक्सलियों से हो जाता है। पुलिस जहां पत्रकारों पर नक्सलियों का साथ देने का आरोप लगाती रही है। वहीं माओवादी अपने स्वार्थ के लिए पत्रकारों की हत्या भी कर चुके हैं। तोंगपाल के नेमीचंद और गंगालूर के सांई रेड्डी की हत्या नक्सलियों ने बीते वर्षों में की है। बस्तर का पत्रकार पुलिस और नक्सली पाट के बीच पिस रहा है।

पांच दिन पहले दरभा पुलिस ने एक स्थानीय पत्रकार संतोष यादव पर पुलिस सूचनाएं लीक करने का आरोप लगाते हुए तथा झीरम कांड का आरोपी ठहराते हुए उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। ऐसा चंद ग्रामीणों के बयान के आधार पर किया गया है। इसमें सच्चाई कितनी है यह सवाल उठ रहे हैं। बस्तर मीडिया का तर्क है कि अगर संतोष यादव खबरें लीक करता था तो पुलिस की गोपनीय बातों को उजागर करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? अगर संतोष दोषी है तो उतने ही दोषी वे पुलिसकर्मी भी हैं जो विभाग की सूचनाएं लीक करते हैं।

दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ के अध्यक्ष बप्पी राय का कहना है कि समाचार संकलन करने अंदरूनी क्षेत्रों में जाने वाले पत्रकारों को रोककर पुलिस व अर्ध सैनिक बलों के जवान पूछताछ के नाम पर परेशान करते रहे हैं। कई बार इनके वाहनों की जांच भी की गई है। कैमरे का मेमोरी कार्ड भी छीनने की कोशिश की जा चुकी है। संतोष यादव भी अंदरुनी क्षेत्रों की रिपोर्टिंग करता था और उसका ऐसे क्षेत्र में आना-जाना आम बात है। महज इस बात को तवज्जो देते उसके विरुद्ध दर्जनों धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाना गलत है। यदि पुलिस के पास साक्ष्य था तो अब तक कार्रवाई करने में विलंब क्यों किया।

राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार जुटेंगे राजधानी में

बस्तर समेत देश में पत्रकारों के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून पारित कराने के लिए संघर्षरत राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार 10 अक्टूबर को रायपुर में एकत्र हो रहे हैं। वे बस्तर जिला के दरभा क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे संतोष यादव समेत बस्तर के पत्रकारों पर हो रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने जा रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में बस्तर के पत्रकारों के भी शामिल होने की संभावना है।

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