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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 01, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chhattisgarh initiative news: नक्सल पीड़ितों का रजिस्टर बना रहे नई शांति प्रक्रिया के सदस्य

Chhattisgarh initiative news: शांति प्रक्रिया के सदस्य हिंसा पीड़ितों का रजिस्टर तैयार कर रहे हैं। 20 हजार आदिवासियों की कहानी एकत्र की है।

By Ravindra ThengdiEdited By: Ravindra Thengdi
Publish Date: Mon, 01 Feb 2021 09:54:00 AM (IST)Updated Date: Mon, 01 Feb 2021 09:54:47 AM (IST)
Chhattisgarh initiative news: नक्सल पीड़ितों का रजिस्टर बना रहे नई शांति प्रक्रिया के सदस्य

अनिल मिश्रा 0 जगदलपुर। Chhattisgarh initiative news: बस्तर में चार दशक से मची नक्सल हिंसा व उसके जवाब में फोर्स के अभियान की वजह से विस्थापित हुए करीब एक लाख आदिवासियों की घर वापसी की राह निकल नहीं पा रही है। बस्तर में शांति के लिए प्रयासरत संस्था नई शांति प्रक्रिया के संयोजक शुभ्रांशु चौधरी ने विस्थापितों का मुद्दा केंद्र व राज्य सरकार के स्तर तक उठाया पर मामला आगे नहीं बढ़ पाया। अब शांति प्रक्रिया के सदस्य हिंसा पीड़ितों का रजिस्टर तैयार कर रहे हैं।

इस समूह ने अब तक करीब 20 हजार आदिवासियों की कहानी एकत्र की है। शांति के समर्थक इस मामले में कोलंबिया समेत माओवाद प्रभावित अन्य देशों के उदाहरण को सामने रखकर शांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल की है। कोलंबिया में पीड़ितों का डाटा तैयार किया गया। उनकी कहानियों को दुनिया के सामने रखा गया। सरकार व विद्रोही दोनों पक्ष बातचीत की टेबल पर आए और वहां समस्या का समाधान हो गया। भारत में बस्तर और खासकर दक्षिण बस्तर के तीन जिलों सुकमा, दंतेवाड़ा व बीजापुर को सर्वाधिक नक्सल प्रभावित इलाका माना जाता है।


इन जिलों में 2005 में नक्सल विरोधी अभियान शुरू हुआ तो हिंसक वारदातों की बाढ़ आ गई। इस दौरान सीमावर्ती इलाकों के करीब एक लाख प्रभावितों ने पलायन कर आंध्रप्रदेश, ओडिशा व तेलंगाना में शरण ली है। इनकी घर वापसी में राष्ट्रीय आदिवासी आयोग ने भी पहल की है। आयोग ने छत्तीसगढ़ समेत सभी संबंधित राज्यों से कहा है कि विस्थापितों का सर्वे कर रिपोर्ट दी जाए। हालांकि यह काम अटका हुआ है। नई शांति प्रक्रिया के सदस्यों ने पीड़ितों की वापसी के लिए वनाधिकार कानून के तहत इन सिटू यानी भूमि के बदले भूमि देने का प्रस्ताव भी रखा है पर प्रभावितों की पहचान का काम कठिन है। अब शांति के पक्षधरों ने पीड़ितों का डाटा बैंक बनाने व उनकी कहानियों को रिकार्ड कर उसे एक वेबसाइट के जरिए दुनिया भर में लांच करने की तैयारी की है। 20 हजार लोगों का डाटा एकत्र किया जा चुका है।

बसाहटों की तलाश में जुटे स्वयंसेवक

नई शांति प्रक्रिया के वालंटियर पड़ोसी राज्यों में विस्थापितों की कालोनियों की तलाश कर रहे हैं। अब तक करीब 65 बसाहटों का पता चला है। इनकी वास्तविक संख्या कितनी है यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इन आंकड़ों को सरकार को सौंपकर इनकी घर वापसी का रास्ता बनाने की कोशिश की जाएगी। शांति प्रक्रिया ने हाल ही में इस समस्या पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबीनार भी कराया था। कई नामचीन हस्तियों ने आदिवासियोें की मदद के हाथ आगे बढ़ाया है।

दांडी मार्च की तैयारी

नई शांति प्रक्रिया के तहत दो साल पहले कोंटा से जगदलपुर तक पैदल मार्च व उसके बाद जगदलपुर से रायपुर तक साइकिल यात्रा का कार्यक्रम रखा गया था। अब मार्च में दंतेवाड़ा से रायपुर तक दांडी मार्च की भी तैयारी की जा रही है।