
नईदुनिया न्यूज, जगदलपुर। अपने प्रियजन को खोने के दुख के बीच चोपड़ा परिवार ने दो अनजान जिंदगियों में रोशनी की उम्मीद जगाई है। राजीव गांधी वार्ड में दुर्गा मंदिर के पास चोपड़ा मेंशन निवासी 79 वर्षीय नानजी भाई दाना भाई चोपड़ा की इच्छा थी कि उनके जाने के बाद भी उनकी आंखें किसी के जीवन को रोशन करने के काम आएं। उनके निधन के बाद स्वजनों ने इस इच्छा को पूरा करते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। परिवार के इस कदम से दो जरूरतमंद लोगों को दृष्टि मिलने की उम्मीद जगी है।
नानजी भाई के बेटे हितेश चोपड़ा और पौत्र सुयश, जय तथा कनिष्ठ ने दुख की घड़ी में मानवीय संवेदना का परिचय दिया। उनकी सहमति के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कार्निया संग्रह की प्रक्रिया पूरी की। जिला अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल अधिकारी एवं नेत्र शल्य चिकित्सक डा. सरिता थामस के नेतृत्व में टीम चोपड़ा निवास पहुंची।
टीम में सहायक नेत्रदान अधिकारी सुंकर अमृत राव, नेत्र सहायक अधिकारी गायत्री कामड़ी और रेमन बघेल के साथ मेडिकल कालेज के स्नातकोत्तर चिकित्सक विनीत, प्रियंका और सतीश तथा सचिवीय सहायक रोहित देवांगन शामिल थे।
परिवार के लिए यह क्षण अपनों को खोने का था, लेकिन उसी दुख के बीच उन्होंने किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उम्मीद पहुंचाने का रास्ता चुना। नेत्रदान के माध्यम से नानजी भाई की स्मृति अब उन लोगों के जीवन से जुड़ सकती है, जो लंबे समय से दुनिया को फिर से देखने की आस लगाए हैं।
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भारत में करीब 11 लाख लोग कार्निया संबंधी अंधत्व से प्रभावित हैं। नेत्रदान के जरिए प्राप्त कार्निया से उपयुक्त मरीजों का प्रत्यारोपण कर दृष्टि लौटाने में मदद मिल सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में कार्यरत नेत्र बैंकों की संख्या 396 है। वर्ष 2024-25 में 69,848 कार्निया संग्रह किए गए, जबकि वर्ष 2022-23 में यह संख्या 62,370 थी। संग्रह में बढ़ोतरी के बावजूद जरूरतमंदों तक प्रत्यारोपण योग्य कार्निया पहुंचाना बड़ी चुनौती है।