अनिल मिश्रा, जगदलपुर, Naxal Commander Hidma। बीजापुर मुठभेड़ में पांच जवानों की शहादत के बाद फोर्स की रणनीति व क्रियान्वयन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दुर्दांत नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के नेतृत्व में नक्सलियों की बटालियन नंबर वन बीजापुर और सुकमा के सरहदी इलाकों में ही सक्रिय है। हिड़मा की बटालियन फोर्स की ताक में पहले से ही थी। इसी हिड़मा की तलाश में निकले जवान नक्सलियों के जाल में फंस गए। गनीमत यही रही कि जवानों के हौसले इन दिनों आसमान पर हैं और नक्सल एंबुश में फंसने के बावजूद उन्होंने बहादुरी दिखाई। ऐसा न होता तो शहादत का आंकड़ा काफी बढ़ सकता था।

ज्ञात हो कि नक्सली इन दिनों टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) चला रहे हैं। 23 मार्च को नक्सलियों ने नारायणपुर जिले में जवानों से भरी एक बस को ब्लास्ट में उड़ाकर अपने इरादे साफ कर दिए थे। टीसीओसी के दौरान नक्सली हर साल वारदात करते हैं यह पुलिस भी जानती है फिर भी हर साल कोई न कोई बड़ी घटना हो ही जाती है। नईदुनिया ने 27 मार्च को प्रमुखता से खबर दी थी कि फोर्स के बढ़ते दबाव से बौखलाए नक्सलियों ने संयुक्त मिलिट्री कमांड का गठन किया है। यह भी बताया था कि दो दिन पहले यानी 25 मार्च को बीजापुर जिले के तर्रेम कैंप के आसपास बड़ी संख्या में नक्सलियों का जमावड़ा देखा गया है।

खुफिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी और इसकी जानकारी नईदिल्ली तक थी। दरअसल तर्रेम नक्सलगढ़ का वह छोर है जहां तक पहुंचना बड़ी बात है। फोर्स ने वहां कैंप खोलकर उन्हें खुली चुनौती दे दी है। अब इससे भी आगे सिलगेर में कैंप खोलने की तैयारी चल रही है। अपने इलाके में फोर्स के बढ़ते दबदबे से बौखलाए नक्सली किसी भी कीमत पर पलटवार करने पर आमादा हैं। ऐसे इलाके में नक्सली जमावड़े की सूचना मिलते ही एक्शन लेने की जरूरत थी। सूत्र बताते हैं कि नक्सल अभियान की प्लानिंग रायपुर व दिल्ली के स्तर पर बन रही है। यही वजह है कि सूचना मिलते ही कोई एक्शन नहीं लिया जाता है और नक्सलियों को मौका मिल जाता है। बीजापुर में भी यही हुआ। इनपुट मिलने के पांच दिन बाद जब फोर्स निकली तो नक्सली तैयार बैठे थे।

हिड़मा सबसे खतरनाक

दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के मिलिट्री विभाग का प्रमुख माड़वी हिड़मा बस्तर का सबसे दुर्दांत नक्सली माना जाता है। जोनल कमेटी के सचिव रमन्ना की मौत के बाद वह सचिव के पद की दावेदारी में शामिल रहा। 2013 में झीरम में कांग्रेस के काफिले पर हमला, 2017 में बुरकापाल में सीआरपीएफ के 25 जवानों की हत्या समेत कई बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड उसे माना जाता है। बस्तर में नक्सलियों की दो बटालियन हैं जिनमें पहली बटालियन का कमांडर वही है। दूसरी बटालियन अबूझमाड़ में सक्रिय है। टीसीओसी में बड़ी वारदातों की रणनीति बनाने और उसे क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी हिड़मा को ही दी गई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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