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स्टील का राजा छत्तीसगढ़: बचेली से 61 गांव होते हुए 138 किमी लंबी पाइपलाइन से स्लरी पहुंची नगरनार, पेलैट प्लांट शुरू

एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ के नगरनार में दो मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला पेलेट प्लांट 27 सितंबर को चालू किया। यह पांच हजार चार सौ सत्ताईस करोड़ रुपये क...और पढ़ें

By Paritosh DubeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 04:35:57 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 04:40:00 PM (IST)
स्टील का राजा छत्तीसगढ़: बचेली से 61 गांव होते हुए 138 किमी लंबी पाइपलाइन से स्लरी पहुंची नगरनार, पेलैट प्लांट शुरू
नगरनार स्टील प्लांट की तस्वीर। अर्काइव

HighLights

  1. स्लरी पाइपलाइन से सड़क रेल परिवहन की समस्या होगी कम
  2. नगरनार पेलेट प्लांट से लौह अयस्क मूल्यवर्धन क्षमता बढ़ी
  3. बचेली से नगरनार तक एकीकृत परियोजना सफलतापूर्वक पूरी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राष्ट्रीय खनिज विकास निगम लिमिटेड (एनएमडीसी) ने छत्तीसगढ़ के नगरनार में अपने दो मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाले पेलेट प्लांट को 27 सितंबर को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह घटना कंपनी की 5427 करोड़ रुपये की एकीकृत लौह अयस्क प्रसंस्करण, स्लरी परिवहन और पेलेट निर्माण परियोजना का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस परियोजना से बचेली स्थित संचालन को नगरनार इस्पात संयंत्र से सीधे जोड़ा गया है।

इस एकीकृत परियोजना के अंतर्गत 138 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन तैयार की गई है। यह पाइपलाइन बचेली से नगरनार तक लौह अयस्क सांद्र (स्लरी)को ले जाने के लिए बनाई गई है। इससे सड़क मार्ग से अयस्क परिवहन की जरूरत काफी कम हो जाएगी। अब तक सड़क पर भारी वाहनों से सामग्री ले जाने में कई समस्याएं आती थीं जैसे ट्रैफिक जाम, सड़क क्षति, पर्यावरण प्रदूषण और मौसम संबंधी बाधाएं। रेलवे पर निर्भरता भी कम होगी क्योंकि रेलवे में वैगन उपलब्धता और लोडिंग अनलोडिंग की देरी अक्सर उत्पादन को प्रभावित करती थी। पाइपलाइन इन दोनों माध्यमों की समस्याओं से निजात दिलाती है और निरंतर सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करती है। यह पाइपलाइन बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों के 61 गांवों से होकर गुजरती है और दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करती है।


बचेली प्रोसेसिंग प्लांट और पेलेट निर्माण प्रक्रिया

परियोजना में बचेली में नया लौह अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र भी शामिल है जिसकी क्षमता 15 टन प्रति वर्ष है। यहां बैलाडिला खदानों से निकलने वाले लौह अयस्क फाइन्स और स्लाइम्स को प्रोसेस कर सांद्र बनाया जाता है। फिर इस सांद्र को स्लरी पाइपलाइन के माध्यम से नगरनार भेजा जाता है जहां स्ट्रेट ग्रेट इंड्यूरेशन तकनीक से पेलेट तैयार किए जाते हैं। ये पेलेट इस्पात निर्माण में उपयोग होते हैं। पहली उत्पादन की निगरानी कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमिताव मुखर्जी और वरिष्ठ नेतृत्व ने मुख्यालय से लाइव की क्योंकि खराब मौसम के कारण वे स्थल पर नहीं पहुंच सके।

मूल्यवर्धन और विस्तार रणनीति का हिस्सा

मुखर्जी ने कहा कि इस परियोजना में तीन प्रमुख घटक शामिल थे प्रसंस्करण सुविधाएं, स्लरी पाइपलाइन और पेलेट प्लांट। लंबे समय तक चले निर्माण कार्य के बाद इसका चालू होना कंपनी के लिए बड़ा मील का पत्थर है। इससे एनएमडीसी अब खनन, बेनीफिशिएशन, स्लरी परिवहन और पेलेट उत्पादन तक अपनी गतिविधियां बढ़ा चुकी है। कंपनी लौह अयस्क उत्पादन क्षमता को दीर्घकाल में एक सौ मिलियन टन तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। नए संयंत्र से बाइलाडिला खदानों के फाइन्स और स्लाइम्स का बेहतर उपयोग संभव होगा तथा मूल्यवर्धित उत्पाद पोर्टफोलियो में जुड़ेंगे।

पर्यावरण और परिवहन दक्षता पर जोर

पाइपलाइन आधारित परिवहन से सड़क और रेल पर दबाव कम होने के साथ पर्यावरणीय लाभ भी होंगे। कम ट्रक आवागमन से कार्बन उत्सर्जन घटेगा और स्थानीय सड़कों की हालत सुधरेगी। रेलवे की क्षमता अन्य जरूरी वस्तुओं के लिए उपलब्ध रहेगी। इस तरह एनएमडीसी ने न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाई है बल्कि परिवहन व्यवस्था को भी आधुनिक और विश्वसनीय बनाया है। नगरनार पेलेट प्लांट का सफल संचालन कंपनी की विस्तार और विविधीकरण रणनीति को मजबूत आधार प्रदान करता है।