अनिमेष पाल, नईदुनिया, जगदलपुर: बस्तर की धरती पर गोलियों और धमाकों की गूंज अक्सर मासूम ज़िंदगियों को चुप कर देती है। माओवादी हिंसा ने अब तक अनगिनत घर उजाड़ दिए, लेकिन इन्हीं अंधेरों के बीच एक ऐसी किरण निकली है जिसने पूरे बस्तर संभाग का नाम रोशन कर दिया। यह कहानी है राकेश कड़ती की-उस बेटे की, जिसने बचपन में ही माता-पिता को माओवादी हिंसा में खो दिया, लेकिन हार मानने के बजाय अपने सपनों को हकीकत में बदल दिया। आज वही राकेश भारत के अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टबॉल खिलाड़ी बनकर नए इतिहास लिख रहे हैं।
राकेश के पिता सोमैया कड़ती और मां शांति को माओवादियों ने निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया था। जिस उम्र में एक बच्चे को मां-बाप का साया चाहिए होता है, उसी उम्र में राकेश के जीवन में अंधेरा छा गया। लेकिन किस्मत यहां थमी नहीं। केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने उनका हाथ थामा और ‘टुमारो फाउंडेशन’ में दाखिला दिलाया। यहीं से राकेश की ज़िंदगी ने नया मोड़ लिया और टूटे सपनों को दिशा मिली।
2017 में बीजापुर में सॉफ्टबॉल अकादमी की स्थापना हुई। कोच सोपान करनेवार ने राकेश की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें अकादमी से जोड़ा। तीसरी कक्षा से पढ़ाई शुरू करने वाला यह बच्चा अब 12वीं कक्षा में कामर्स की पढ़ाई कर रहा है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सॉफ्टबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
पिचर की भूमिका निभाने वाले राकेश अब तक 14 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2023 में अंडर-18 एशिया कप और 2025 में थाईलैंड में आयोजित अंडर-23 एशिया कप में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, हौसले और मेहनत से हर मंज़िल पाई जा सकती है।
इस वर्ष राष्ट्रीय खेल दिवस पर रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उन्हें ‘शहीद कौशल यादव अवार्ड’ से सम्मानित करेंगे। मुख्यमंत्री साय के जापान और कोरिया के प्रवास से लौटने के बाद आयोजित होने वाले समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा। यह सम्मान केवल राकेश की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बीजापुर और बस्तर के लिए गौरव का क्षण है, क्योंकि पहली बार इस क्षेत्र का कोई खिलाड़ी राज्य स्तरीय खेल सम्मान से अलंकृत होगा।
राकेश की यात्रा इस सच्चाई को उजागर करती है कि हिंसा और खोखली विचारधारा इंसान के जज़्बे को नहीं दबा सकती। माओवादी गोलियों ने उनके माता-पिता छीन लिए, लेकिन उनके सपनों को नहीं मार पाए। आज राकेश हर युवा के लिए एक प्रेरणा हैं, यह संदेश देते हुए कि, ''अंधेरा चाहे जितना भी गहरा हो, अगर हौसला हो तो उजाला अपना रास्ता ढूंढ ही लेता है।''